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प्रश्न
इस सत्र में पढ़ी गई किस कविता में फागुन के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किया गया है? उसे अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर
इस सत्र की पढ़ी गई कविता 'अट नहीं रहीं है' में फागुन के प्राकृति सौंदर्य का वर्णन किया गया है। इस कविता में कवी ने अपने अंतर्मन के भावों को व्यक्त करते हुए फागुन के अनूठे सौंदर्य का वर्णन किया है। फागुन में प्रकृति ने फिर अपना नए सिरे से शृंगार किया है। बालक, वृद्ध सभी फागुन की मस्ती में लीन होकर झूमने - नाचने लग जाते हैं। चारों ओर सुगंधित फूल खिले होते हैं। आम के पेड़ों पर बौर आने लगती है। उनकी सुगंध से मस्त होकर कोयल कूकने लगती है। फागुन की शोभा जगह - जगह छा जाती है। स्वयं कवी भी फागुन के सौंदर्य में डूब जाते हैं। फागुन की सुंदरता ऐसी है जिसे शब्दबद्ध भी नहीं किया जा सकता।
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