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प्रश्न
'जाग तुझको दूर जाना है' कविता में कवयित्री स्वयं के मन तथा मानव मन को क्या संदेश देना चाहती हैं? कविता की पंक्तियाँ कहीं-न-कहीं हम सब में एक नया उत्साह भरती हैं। कविता के आधार पर इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
'जाग तुझको दूर जाना है' कविता में कवयित्री का उद्देश्य स्वयं के मन और समस्त मानव मन को जागरूक करना और प्रेरित करना है। यह कविता हमें हमारे जीवन के उद्देश्य की याद दिलाती है और हमें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है। कवयित्री हमें यह संदेश देती हैं कि जीवन में हमें आलस्य, निराशा और अवसाद को त्यागकर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। कविता की पंक्तियाँ हमें यह बताती हैं कि जीवन में कठिनाइयाँ और चुनौतियाँ आएँगी, लेकिन हमें उनसे घबराना नहीं चाहिए बल्कि उन्हें स्वीकार कर, उनसे सीखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। कवयित्री की यह पंक्तियाँ हम सभी में एक नया उत्साह भरती हैं और हमें आत्मविश्वास से भर देती हैं। कवयित्री कहती हैं कि समय रुकता नहीं है, वह निरंतर चलता रहता है। हमें भी उसी के साथ कदम मिलाकर चलना होगा। यह कविता हमें यह भी सिखाती है कि हमारा मन यदि जागृत और उत्साही रहेगा तो हम किसी भी कठिनाई का सामना कर सकते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
इस प्रकार, 'जाग तुझको दूर जाना है' कविता हमें हमारे जीवन की महत्वपूर्ण सच्चाइयों से अवगत कराती है और हमें प्रेरित करती है कि हम अपने जीवन में ऊँचाइयों को छूने के लिए सदैव जागरूक और तत्पर रहें। इस कविता के माध्यम से कवयित्री हम सभी में आत्मविश्वास, साहस और उत्साह का संचार करती हैं। महादेवी जी मनुष्य के मन को सावधान करती हैं कि संसारके मोह-माया के बंधन से मुक्त होकर निरंतर आगे बढ़ते जानाहै और अपनी मंजिल को प्राप्त करना है। कवयित्री प्रेरणा देतीहैं कि उसे सदा अंगारों की शय्या अथवा कठिनाइयों से भरे मार्गपर चलने के लिए तत्पर रहना है।
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