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प्रश्न
सूरदास जी की भक्ति भावना पर प्रकाश डालते हुए संकलित पदों के आधार पर श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं तथा माता यशोदा के वात्सल्य भाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर
सूरदास जी भारतीय भक्ति काव्य के प्रमुख कवि थे, जिन्होंने अपनी कविताओं में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और माता यशोदा के वात्सल्य भाव का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया है। उनकी भक्ति भावना अत्यंत गहरी और सच्ची थी, जो उनकी रचनाओं में स्पष्ट झलकती है। सूरदास जी ने अपने पदों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को चित्रित किया है, जिसमें उनका नटखटपन, उनकी भोली मुस्कान और उनकी चंचलता का अद्वितीय वर्णन मिलता है। सूरदास जी के पदों में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन बहुत ही सजीव और मनमोहक है। उन्होंने श्रीकृष्ण के माखन चुराने, गोपियों के साथ रास रचाने और उनकी बाल-सुलभ शरारतों का अत्यंत रोचक तरीके से वर्णन किया है। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में उनकी सरलता, ममता और अनन्य भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। सूरदास जी के पदों में श्रीकृष्ण के प्रति उनकी असीम भक्ति और प्रेम प्रकट होता है।
माता यशोदा के वात्सल्य भाव का वर्णन करते हुए सूरदास जी ने उनकी ममता, स्नेह और करुणा को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है। उन्होंने यशोदा के उस वात्सल्य का वर्णन किया है जब वह श्रीकृष्ण को नहलाती, सुलाती और उनके क्रीड़ाओं को देखकर प्रसन्न होती हैं। सूरदास जी के पदों में यशोदा की चिंता, जब श्रीकृष्ण गायब हो जाते हैं या जब वह शरारत करते हैं, को भी बहुत ही भावपूर्ण ढंग से व्यक्त किया गया है। सूरदास जी की भक्ति भावना और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन उनकी रचनाओं को अद्वितीय बनाता है। उनकी कविताओं में बाल कृष्ण का जो चित्रण मिलता है, वह न केवल भक्तों के हृदय को छू लेता है, बल्कि उनमें भक्ति और प्रेम की भावना भी जागृत करता है। सूरदास जी की रचनाएँ भारतीय भक्ति साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं, जो आज भी लोगों को भक्ति मार्ग पर प्रेरित करती हैं।
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