Advertisements
Advertisements
प्रश्न
कबीर ने ईश्वर को 'सब स्वाँसों की स्वाँस में' क्यों कहा है?
उत्तर
'सब स्वाँसों की स्वाँस में' से कवि का तात्पर्य यह है कि ईश्वर कण-कण में व्याप्त हैं, सभी मनुष्यों के अंदर हैं। जब तक मनुष्य की साँस (जीवन) है तब तक ईश्वर उनकी आत्मा में हैं।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
आपके विचार से कवि पशु, पक्षी और पहाड़ के रूप में भी कृष्ण का सान्निध्य क्यों प्राप्त करना चाहता है?
कोयल असमय चीख पड़ी थी। उसके इस प्रकार चीखने के कारणों के बारे में कवि क्या-क्या कल्पनाएँ करता है।
कवि की अँगुलियाँ किस पर गाने लिख रही थीं और कैसे?
मनुष्य ईश्वर को कहाँ-कहाँ ढूँढ़ता फिरता है?
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए -
पखापखी, अनत, जोग, जुगति, बैराग, निरपख
‘बच्चे, बहुत छोटे बच्चे’ पंक्ति के आलोक में स्पष्ट कीजिए कि कवि किस बात पर हर देश चाहता है?
कवि ने गाँव को 'हरता जन मन' क्यों कहा है?
भाव स्पष्ट कीजिए -
हँसमुख हरियाली हिम-आतप
सुख से अलसाए-से सोए
लता ने बादल रूपी मेहमान को किस तरह देखा और क्यों?
कविता में आए मुहावरों को छाँटकर अपने वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए।