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प्रश्न
कहानी में वर्णित पात्रों का चरित्र-चित्रण, नाटक में किस प्रकार दिखाया जाता है?
उत्तर
कहानी का संचालन उसके पात्रों द्वारा ही होता है, और पात्रों के गुण-दोष को उनके 'चरित्र चित्रण' के रूप में जाना जाता है। यदि यह चरित्र चित्रण कहानीकार द्वारा किया जाए तो इसे 'प्रत्यक्ष' कहा जाता है, और यदि यह संवादों के माध्यम से हो तो इसे 'अप्रत्यक्ष' या 'परोक्ष चरित्र चित्रण' कहते हैं।
नाटक में विचारों और भावनाओं का प्रस्तुतीकरण पात्रों के माध्यम से किया जाता है, इसलिए पात्रों का नाटक में विशेष महत्व होता है। मुख्य पात्र या नाटक कला का मुख्य आधार होता है और समाज को सही दिशा देने वाला होता है। भारतीय परंपरा के अनुसार, नाटक विनम्र, सुंदर, शीलवान, त्यागी और उच्च कुलीन होना चाहिए। लेकिन वर्तमान समय में नाटकों में किसान, मजदूर या कोई भी व्यक्ति पात्र बन सकता है।
पात्रों के संदर्भ में नाटककार को उन्हीं पात्रों का सृजन करना चाहिए जो घटनाओं को आगे बढ़ाने और नाटक के चरित्र को उजागर करने में सहायक हों।