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प्रश्न
‘क्रोध मनुष्य का मानसिक स्वास्थ्य बिगाड़ता है’, इस बारे में अपने विचार लिखिए।
उत्तर
क्रोध मनुष्य का मानसिक विकार है। क्रोध एक ऐसी बीमारी है, जो मनुष्य को अक्सर निंदा का पात्र बना देती है। क्रोध किसी भी व्यक्ति का स्वभाव नहीं है। यह एक अर्जित विकार है। क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। व्यक्ति में उत्पन्न क्रोध जब उग्र रूप ले लेता है, तब वह तरह-तरह की स्वास्थ्यगत समस्याएँ उत्पन्न करता है। जो व्यक्ति क्रोध करता है, वह अपनी किसी भूल से क्रोध नहीं करता, हमेशा दूसरे की भूल से क्रोध करता है। क्रोध मनुष्य की शांति भंग करने वाला मनोविकार है। क्रोध की अवस्था में मनुष्य अपना संतुलन खो देता है, शरीर में खून का संचार बढ़ जाता है, आँखें लाल हो जाती हैं। क्रोध करने वाले व्यक्ति को उसे रात में नींद नहीं आती है, ठीक से भूख नहीं लगती और मित्रों के मध्य वह घृणा का पात्र समझा जाता है। क्रोधी व्यक्ति निर्जीव वस्तुओं पर भी क्रोध करने से नहीं चूकता। क्रोध से बचने का स्थायी और वास्तविक उपाय तो यही है कि हम क्रोध के कारण को मालूम करने की कोशिश करें। अब कोई व्यक्ति हमारा कहना नहीं मानता या हमारी इच्छा के विरुद्ध काम करता है तो हम आप से बाहर हो जाते हैं और उस पर अधिक क्रोध हैं। हम यह समझने की तकलीफ ही नहीं करते कि हमें दूसरों को अपनी इच्छानुसार चलने का अधिकार है। हमारा शरीर शांति चाहता है, लेकिन हम अपने विकारों से ग्रस्त होकर किसी कारण के बगैर क्रोधित होकर शरीर को अशांत कर देते हैं।
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