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प्रश्न
क्षारों के साथ कुछ ऐल्किलहैलाइड प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ देते हैं जबकि कुछ निराकरण अभिक्रियाएँ। उदाहरणों की सहायता से ऐल्किल हैलाइडों के उन संरचनात्मक गुणों की विवेचना कीजिए जो इस अंतर का कारण हैं।
उत्तर
जब β-हाइड्रोजन परमाणु युक्त एक ऐल्किल हैलाइड किसी क्षार अथवा नाभिकरागी के साथ अभिक्रिया करता है तो दो प्रतिस्पर्धात्मक पथ उपलब्ध होते हैं- प्रतिस्थापन (SN1 तथा SN2) तथा विलोपन। किस पथ का चयन होगा, यह ऐल्किल हैलाइड की प्रकृति, क्षार, नाभिकरागी का आकार एवं सामर्थ्य तथा अभिक्रिया की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। अतः एक बड़ा नाभिकरागी क्षार के समान व्यवहार को प्राथमिकता देता है तथा चतुष्फलकीय कार्बन परमाणु के निकट जाने के स्थान पर एक प्रोटॉन का आहरण करता हैं (त्रिविम कारण)।
इसी प्रकार से प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड SN2 अभिक्रिया को प्राथमिकता देगा, द्वितीयक ऐल्किल हैलाइड की प्राथमिकता SN2 की होगी अथवा विलोपन की; यह क्षार अथवा नाभिकरागी की सामर्थ्य पर निर्भर करता है तथा तृतीयक ऐल्किल हैलाइड SN1 को प्राथमिकता देगा अथवा विलोपन को यह कार्बोकैटायन के स्थायित्व अथवा ऐल्कीन के अधिक प्रतिस्थापन पर निर्भर करेगा।
उदाहरणार्थ:
(i) \[\ce{\underset{{1-ब्रोमोप्रोपोन्स}}{CH3 - CH2 - CH2 - Br} ->[KOH(aq)/Δ][{(विहाइड्रोहैलोजनन)}] \underset{{प्रोपीन}}{CH3 - CH = CH2}} \]
(ii) यदि वही प्रतिक्रिया जलीय KOH की उपस्थिति में की जाती है, तो 1-प्रोपेनॉल उत्पाद होगा।
\[\ce{CH3 - CH2 - CH2 - Br ->[{जलीय}KOH] CH3 - CH2 - CH2 OH}\]
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संबंधित प्रश्न
सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ C6H5CH2Br की अभिक्रिया ______ अग्रसारित होती है।
नीचे दिए गए अणु में कौन-से कार्बन परमाणु असममित हैं?
\[\begin{array}{cc}
\phantom{}\ce{HO}\phantom{.....}\ce{OH}\phantom{..}\ce{H}\phantom{.....}\ce{O}\phantom{..}\\
\phantom{..}\backslash\phantom{.....}|\phantom{....}|\phantom{.....}//\phantom{.}\\
\ce{\overset{a}{C} - \overset{b}{C} - \overset{c}{C} - \overset{d}{C}}\\
\phantom{..}//\phantom{.....}|\phantom{....}|\phantom{....}\phantom{.}\backslash\phantom{...}\\
\phantom{}\ce{O}\phantom{......}\ce{H}\phantom{...}\ce{OH}\phantom{....}\ce{H}\phantom{}\\
\end{array}\]
निम्न यौगिकों में से कौन-सा OH− आयन द्वारा नाभिकरागी प्रतिस्थापन से रेसिमिक मिश्रण देगा।
(a) \[\begin{array}{cc}
\phantom{}\ce{CH3 - CH - Br}\\
\phantom{}|\\
\phantom{....}\ce{C2H5}\phantom{}
\end{array}\]
(b) \[\begin{array}{cc}
\phantom{..}\ce{Br}\\
\phantom{}|\\
\phantom{}\ce{CH3 - C - CH3}\\
\phantom{}|\\
\phantom{....}\ce{C2H5}\phantom{}
\end{array}\]
(c) \[\begin{array}{cc}
\ce{CH3 - CH - CH2Br}\\
|\phantom{.....}\\
\ce{C2H5}\phantom{..}
\end{array}\]
निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया में अभिक्रिया दर के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(a) | ![]() |
(b) | ![]() |
(c) | ![]() |
निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया में अभिक्रिया दर के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
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(c) | ![]() |
अभिक्रिया माध्यमिक के लिए निम्नलिखित में से कोन-से कथन सही हैं?
(i) माध्यमिक (c) अस्थायी है क्योंकि इसमें कार्बन पाँच परमाणुओं से जुड़ा है।
(ii) माध्यमिक (c) अस्थायी है क्योंकि इसमें कार्बन परमाणु sp2 संकरित है।
(iii) माध्यमिक (c) स्थायी है क्योंकि इसमें कार्बन परमाणु sp2 संकरित है।
(iv) माध्यमिक (c) अभिक्रियक (b) से कम स्थायी है।
इस अभिक्रिया की गतिकी के लिए कौन-से कथन सही हैं?
(i) अभिक्रिया की दर केवल (b) की सांद्रता पर निर्भर करती है।
(ii) अभिक्रिया की दर (a) और (b) दोनों की सांद्रता पर निर्भर करती है।
(iii) अभिक्रिया की आण्विकता एक है।
(iv) अभिक्रिया की आण्विकता दो है।
हैलोऐरीन, हैलोऐल्केन और हैलोऐल्कीन से कम क्रियाशील होती हैं। समीक्षा कीजिए।
निम्नलिखित संरचना से संबंधित अन्य अनुनाद संरचनाएँ लिखिए और ज्ञात कीजिए कि अणु में उपस्थित प्रकार्यात्मक समूह ऑर्थो-पैरा निदर्शन वाला है या मेटा निदर्शन वाला।
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निम्नलिखित यौगिकों में से किसकी SN1 अभिक्रिया द्रुतगामी होगी और क्यों?
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(क) | (ख) |
ग्रीन्यार अभिकर्मक के उपयोग में लेशमात्र नमी भी न होना क्यों आवश्यक है?
कॉलम I और कॉलम II के मदों को सुमेलित कीजिए।
कॉलम I | कॉलम II |
(i) SN1 अभिक्रिया | (a) विस-डाइब्रोमाइड |
(ii) अग्निशामक में रसायन | (b) जेम-डाइहैलाइड |
(iii) ऐल्कीनों का ब्रोमीनन | (c) रेसिमीकरण |
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