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कुटज को 'गाढ़े का साथी' क्यों कहा गया है? - Hindi (Elective)

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प्रश्न

कुटज को 'गाढ़े का साथी' क्यों कहा गया है?

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उत्तर

कुटज ऐसा साथी है, जो कठिन दिनों में साथ रहा है। कालिदास ने अपनी रचना में जब रामगिरी पर्वत पर यक्ष को बादल से अनुरोध करने भेजा था, तो वहाँ कुटज का पेड़ ही विद्यमान था। उस समय में कुटज के फूल ही उसके काम आए थे। ऐसे स्थान पर जहाँ दूब तक पनप नहीं पाती है। यक्ष ने कुटज के फूल चढ़ाकर ही मेघ को प्रसन्न किया था। अतः उसे गाढ़े का साथी कहा गया है।
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कुटज
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अध्याय 2.1: हजारी प्रसाद द्विवेदी (कुटज) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १६९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
अध्याय 2.1 हजारी प्रसाद द्विवेदी (कुटज)
प्रश्न-अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ १६९

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निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
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निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
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निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
हृदयेनापराजितः! कितना विशाल वह हृदय होगा जो सुख से, दुख से, प्रिय से, अप्रिय से विचलति न होता होगा! कुटज को देखकर रोमांच हो आता है। कहाँ से मिलती है यह अकुतोभया वृत्ति, अपराजित स्वभाव, अविचल जीवन दृष्टि!'


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