Advertisements
Advertisements
प्रश्न
लैन्थेनॉयड आकुंचन के परिणाम क्या हैं?
उत्तर
(१) द्वितीय तथा तृतीय संक्रमण श्रेणियों की समानता (Resemblance of second and third transition series) – आवर्त सारणी में लैन्थेनाइडों से पहले तथा बाद में आने वाले तत्वों के आपेक्षिक गुणों पर इसका महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। अग्रलिखित सारणी से स्पष्ट होता है कि Sc से Y तथा Y से La तक आकार में नियमित वृद्धि होती है।
सारणी d-ब्लॉक के तत्वों की परमाणु त्रिज्याएँ (pm में)
Sc | Ti | V | Cr | Mn | Fe | Co | Ni | Cu | Zn |
164 | 147 | 135 | 129 | 137 | 126 | 125 | 125 | 128 | 137 |
Y | Zr | Nb | Mo | Tc | Ru | Rh | Pd | Ag | Cd |
180 | 160 | 146 | 139 | 136 | 134 | 134 | 137 | 144 | 154 |
La* | Hf | Ta | W | Re | Os | Ir | Pt | Au | Hg |
187 | 158 | 146 | 139 | 137 | 135 | 136 | 138 | 144 | 157 |
लैन्थेनॉयड आकुंचन इसी प्रकार हम अन्य वर्गों में आकार में सामान्य वृद्धि की अपेक्षा कर सकते हैं, यद्यपि लैन्थेनॉयडों के पश्चात् द्वितीय से तृतीय संक्रमण श्रेणियों में त्रिज्याओं की वृद्धि लगभग नगण्य होती है।
\[\ce{Ti -> Zr -> Hf}\]
\[\ce{V -> Nb -> Ta}\]
आदि तत्वों के युग्मों; जैसे- Zr – Hf, Nb – Ta, Mo – W आदि के आकार समान (लगभग) होते हैं तथा इन तत्वों के गुण भी समान होते हैं। अत: लैन्थेनॉयड आकुंचन के परिणामस्वरूप द्वितीय तथा तृतीय संक्रमण श्रेणियों के तत्व, प्रथम तथा द्वितीय संक्रमण श्रेणियों के तत्वों की तुलना में परस्पर अत्यधिक समानता रखते हैं।
(२) लैन्थेनॉयडों में समानता (Similarity among lanthanides) – लैन्थेनॉयडों की त्रिज्याओं में अत्यंत अल्प-परिवर्तन के कारण, इनके रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं। अतः तत्वों को शुद्ध अवस्था में पृथक्कृत करना अत्यन्त कठिन होता है। पुनरावृत्त प्रभाजी क्रिस्टलन अथवा आयन-विनिमय तकनीकों पर आधारित आधुनिक विधियों द्वारा इनके त्रिसंयोजी आयनों के आकारों में अत्यल्प-अंतर के आधार पर इन्हें पृथक्कृत किया जाता है। इन विधियों द्वारा तत्वों के गुणों जैसे विलेयता, संकुल आयन निर्माण, जलयोजन आदि में बहुत कम अन्तर के आधार पर इन्हें पृथक्कृत किया जाता है।
(३) क्षारकता अन्तर (Basicity differences) – लैन्थेनॉयड आकुंचन के कारण लैन्थेनॉयड आयनों का आकार, परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ नियमित रूप से घटता है। आकार में कमी के फलस्वरूप लैन्थेनॉयड आयन तथा OH आयनों के मध्य इनके सहसंयोजक गुण La3+ से Lu3+ तक बढ़ते हैं, इसलिए परमाणु क्रमांक बढ़ने पर हाइड्रॉक्साइडों की क्षारकीय सामर्थ्य घटती है। अत: La(OH)3 अधिकतम क्षारकीय है, जबकि Lu(OH)3 सबसे कम क्षारकीय है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
लैन्थेनॉयड आकुंचन क्या है?
लैन्थेनॉयडों द्वारा कौन-कौन सी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित की जाती हैं?
निम्नलिखित के संदर्भ में लैन्थेनॉयड एवं ऐक्टिनॉयड के रसायन की तुलना कीजिए।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
निम्नलिखित के संदर्भ में लैन्थेनॉयड एवं ऐक्टिनॉयड के रसायन की तुलना कीजिए।
परमाण्वीय एवं आयनिक आकार
निम्नलिखित के संदर्भ में लैन्थेनॉयड एवं ऐक्टिनॉयड के रसायन की तुलना कीजिए।
ऑक्सीकरण अवस्था
निम्नलिखित के संदर्भ में लैन्थेनॉयड एवं ऐक्टिनॉयड के रसायन की तुलना कीजिए।
रासायनिक अभिक्रियाशीलता
ऐक्टिनॉयड तत्वों का रसायन उतना नियमित नहीं है जितना कि लैन्थेनॉयड तत्वों का रसायन। इन तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं के आधार पर इस कथन का आधार प्रस्तुत कीजिए।
लैन्थेनॉयड श्रेणी के उन सभी तत्वों का उल्लेख कीजिए जो +4 तथा जो +2 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाते हैं। इस प्रकार के व्यवहार तथा उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के बीच संबंध स्थापित कीजिए।
61, 91, 101 तथा 109 परमाणु क्रमांक वाले तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
लैन्थेनॉयड धातुओं से युक्त एक प्रमुख मिश्रातु का उल्लेख कीजिए।