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माधवदास के प्रलोभनों के बावजूद चिड़िया उसके पास क्यों नहीं रुकी? - Hindi (हिंदी)

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प्रश्न

माधवदास के प्रलोभनों के बावजूद चिड़िया उसके पास क्यों नहीं रुकी?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

माधवदास के बार-बार समझाने के बावजूद भी चिड़िया सोने के पिंजरे और सुख-सुविधाओं को कोई महत्त्व नहीं दे रही थी। दूसरी तरफ़ माधवदास की नज़र में चिड़िया की ज़िद का कोई तुक नहीं था। चिड़िया और माधवदास के मनोभावों में अंतर था। उनकी जरूरतें आकांक्षाएँ तथा खुशियाँ माधवदास के विपरीत थीं। माधवदास की नज़र में सोना-चाँदी, शक्ति और संपन्नता सब कुछ बड़ी थी। इन्हीं आधारों पर वह हर खुशी हासिल करना चाहते थे। चिडिया के लिए इन सब वस्तुओं का कोई मोल नहीं था। उसके लिए उसकी माँ ही सब कुछ थी। धूप, हवा और फूल में किसी चीज़ का उसके लिए कोई मोल नहीं था। उसको अपना घर और परिवार ही सबसे अच्छा लगता था। उसके लिए सोने-चाँदी, धन संपत्ति का कोई महत्व नहीं था। इसके मायने भी वे नहीं समझती थी। इन सब कारणों से माधवराव के प्रलोभनों के बावजूद चिड़िया उनके बहकावे में नहीं आई।

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गद्य (Prose) (Class 7)
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अध्याय 9: चिड़िया की बच्ची - अतिरिक्त प्रश्न

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एनसीईआरटी Hindi - Vasant Part 2 Class 7
अध्याय 9 चिड़िया की बच्ची
अतिरिक्त प्रश्न | Q 16

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