Advertisements
Advertisements
प्रश्न
माघ के मास में विरहिणी के भावों को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
माघ के मास में विरहिणी के भावों को निम्नलिखित शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है:
-
उत्सुकता (अत्यंत आकुलता): माघ के मास में विरहिणी अपने प्रेमी या प्रेमिका से दूर रहकर उत्सुक होती हैं, उनके साथ समय बिताने की बेहद इच्छुक होती हैं।
-
मेल की तलाश (संग से दूरी का अहसास): इस मास में विरहिणी को अपने प्रेमी या प्रेमिका से मिलने की तलाश होती है, और वे उनकी यादों में खो जाती हैं।
-
धैर्य और आशंका (इंतजार की भावना): माघ में विरहिणी को अपने प्यार के लिए धैर्य रखने की आवश्यकता हो सकती है, और वे अपने साथी के वापसी की आशंका में रहती हैं।
-
प्रेम और श्रद्धा (विश्वास और स्नेह): इस मास में विरहिणी का प्रेम अपने साथी के प्रति मजबूत हो सकता है, और वे उनके प्रति गहरी श्रद्धा और स्नेह रखती हैं।
-
आकांक्षा (संगी के पास जाने की): विरहिणी के मन में माघ के मास में अपने प्रेमी या प्रेमिका के पास जाने की आकांक्षा होती है, और वे उनसे मिलने के लिए बेताब रहती हैं।
-
दुःख (संग से दूर रहकर): इस मास में विरहिणी को अकेलापन और संग से दूर रहकर एक प्रकार का दुःख हो सकता है, जिसे वह अपने दिल में महसूस करती हैं।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
अगहन मास की विशेषता बताते हुए विरहिणी (नागमती) की व्यथा-कथा का चित्रण अपने शब्दों में कीजिए।
'जीयत खाइ मुएँ नहिं छाँड़ा' पंक्ति के संदर्भ में नायिका की विरह-दशा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
माघ महीने में विरहिणी को क्या अनुभूति होती है?
वृक्षों से पत्तियाँ तथा वनों से ढाँखें किस माह में गिरते हैं? इससे विरहिणी का क्या संबंध है?
निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए-
पिय सौं कहेहु सँदेसड़ा, ऐ भँवरा ऐ काग।सो धनि बिरहें जरि मुई, तेहिक धुआँ हम लाग।
निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए-
रकत ढरा माँसू गरा, हाड़ भए सब संख।धिन सारस होई ररि मुई, आइ समेटहु पंख।
निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए-
तुम्ह बिनु कंता धनि हरुई, तन तिनुवर भा डोल।
तेहि पर बिरह जराई कै, चहै उड़ावा झोल।।
निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए-
यह तन जारौं छार कै, कहौं कि पवन उड़ाउ।
मकु तेहि मारग होई परौं, कंत धरैं जहँ पाउ॥
बारहमासा का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।