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प्रश्न
मैदानी खेल और घरेलू खेल के बीच के अंतर को स्पष्ट कीजिए।
अंतर स्पष्ट करें
उत्तर
मैदानी खेल और घरेलू खेल के बीच निम्नलिखित बातों में अंतर है:
मैदानी खेल | घरेलू खेल |
१. मैदानी खेल मैदान में खड़े होकर खेले जाते हैं। | १. घरेलू खेल बैठकर खेले जाते हैं। ये खेल घर में अथवा कहीं पर बैठकर खेले जा सकते हैं। |
२. मैदानी खेलों के लिए व्यायाम तथा कौशल की अधिक आवश्यकता होती है। | २. घरेलू खेलों में अपेक्षाकृत कम व्यायाम तथा कौशल की आवश्यकता होती है। |
३. मैदानी खेलों के लिए शारीरिक क्षमता, शक्ति की आवश्यकता होती है। | ३. इन खेलों के लिए शारीरिक क्षमता, शक्ति की आवश्यकता नहीं होती। |
४. शक्ति अधिक खर्च होने के कारण इन खेलों में थकान जल्दी आती है। | ४. शक्ति की आवश्यकता न होने के कारण इन खेलों में थकान जल्दी नहीं आती। |
५. मैदानी खेल रोमांचक होते हैं, आनंद भी अधिक मिलता है। | ५. घरेलू खेल रोमांचक नहीं होते, आनंद कम मिलता है। |
६. मैदानी खेलों में शारीरिक कौशल की आवश्यकता होने से प्रशिक्षण तथा अभ्यास की आवश्यकता होती है। | ६. घरेलू खेलों में शारीरिक कौशल की आवश्यकता न होने से प्रशिक्षण तथा अभ्यास की उतनी आवश्यकता नहीं होती। |
७. मैदानी खेलों में कबड्डी, हॉकी, खो-खो, क्रिकेट आदि देशी तथा विदेशी खेलों का समावेश होता है। | ७. घरेलू खेलों में शतरंज, ताश आदि बैठकर खेले जाने वाले खेलों का समावेश होता है। |
८. अधिकतर सभी मैदानी खेलों के लिए स्थानीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित की जाती हैं। | ८. कैरम, शतरंज आदि खेलों को छोड़कर अन्य घरेलू खेलों के लिए प्रतियोगिता का आयोजन नहीं किया जाता। |
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खेलों के प्रकार
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निम्न में से असत्य जोड़ी को पहचानकर लिखिए।
दिए गए समूह में से गलत जोड़ी पहचानकर लिखिए:
नीचे दिए गए संकल्पना-चित्र को पूर्ण कीजिए:
निम्न कथन कारण सहित स्पष्ट कीजिए:
मेजर ध्यानचंद को “हॉकी का जादूगर' कहा जाता है।
निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़कर इसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (4)
मेजर ध्यानचंद हॉकी के विशेषज्ञ खिलाड़ी और भारतीय हॉकी टीम के कप्तान थे। उनके नेतृत्व में 1936 ई.स. में भारतीय हॉकी टीम ने बर्लिन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता। इसके पहले भारतीय हॉकी टीम ने 1928 ई.स. में और 1982 ई.स. में भी स्वर्ण पदक जीते थे। इन मैचों में ध्यानचंद भारतीय टीम में खिलाड़ी के रूप में खेले थे। 29 अगस्त उनका जन्मदिवस है तथा इस दिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। मेजर ध्यानचंद को 'हॉकी का जादूगर' कहा जाता है। उन्होंने हॉकी में जिस बढ़िया खेल का प्रदर्शन किया, इस कारण उन्हें 1956 ई.स. में 'पद्मभूषण' सम्मान से विभूषित किया गया। |
- 'हॉकी का जादूगर' किसे कहा जाता है? (1)
- भारत में मेजर ध्यानचंद का जन्मदिवस किस रूप में मनाया जाता है? (1)
- ओलंपिक स्पर्धाओं में मेजर ध्यानचंद द्वारा दिए गए योगदान कीजानकारी संक्षेप में लिखिए। (2)