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प्रश्न
निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़कर इसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (4)
मेजर ध्यानचंद हॉकी के विशेषज्ञ खिलाड़ी और भारतीय हॉकी टीम के कप्तान थे। उनके नेतृत्व में 1936 ई.स. में भारतीय हॉकी टीम ने बर्लिन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता। इसके पहले भारतीय हॉकी टीम ने 1928 ई.स. में और 1982 ई.स. में भी स्वर्ण पदक जीते थे। इन मैचों में ध्यानचंद भारतीय टीम में खिलाड़ी के रूप में खेले थे। 29 अगस्त उनका जन्मदिवस है तथा इस दिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। मेजर ध्यानचंद को 'हॉकी का जादूगर' कहा जाता है। उन्होंने हॉकी में जिस बढ़िया खेल का प्रदर्शन किया, इस कारण उन्हें 1956 ई.स. में 'पद्मभूषण' सम्मान से विभूषित किया गया। |
- 'हॉकी का जादूगर' किसे कहा जाता है? (1)
- भारत में मेजर ध्यानचंद का जन्मदिवस किस रूप में मनाया जाता है? (1)
- ओलंपिक स्पर्धाओं में मेजर ध्यानचंद द्वारा दिए गए योगदान कीजानकारी संक्षेप में लिखिए। (2)
संक्षेप में उत्तर
उत्तर
- 'हॉकी का जादूगर' मेजर ध्यानचंद को कहा जाता है।
- भारत में मेजर ध्यानचंद का जन्मदिवस राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- मेजर ध्यान चंद का ओलंपिक्स में योगदान असाधारण था। वे भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा थे जिसने 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक्स, 1932 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक्स, और 1936 के बर्लिन ओलंपिक्स में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीते। विशेष रूप से 1936 के बर्लिन ओलंपिक्स में, उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक जीता। उनके हॉकी स्टिक के साथ असाधारण कौशल और खेल को नियंत्रित करने और गोल करने की क्षमता ने उन्हें 'हॉकी का जादूगर' की उपाधि दिलाई। उनकी हॉकी में विरासत ने न केवल भारत को गौरवान्वित किया बल्कि अनेकों को इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित भी किया।
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