Advertisements
Advertisements
प्रश्न
महात्मा गाँधी ने स्वयं को सामान्य लोगों जैसा दिखाने के लिए क्या किया?
उत्तर
महात्मा गाँधी ने स्वयं को सामान्य लोगों जैसा दिखाने के लिए अनेक कदम उठाएगाँधी ने भारतीय जनता की दशा को सुधारने के लिए लगभग एक वर्ष तक देश के विभिन्न भागों को भ्रमण किया। गाँधी जी की प्रथम महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक उपस्थिति फरवरी 1916 ई० में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में हुई। गाँधी जी ने समारोह में उपस्थित भद्रजनों एवं अनुपस्थित लाखों गरीबों के मध्य दिन-प्रतिदिन बढ़ती हुई आर्थिक विषमता के प्रति चिंता व्यक्त की। समारोह में बोलते हुए गाँधी जी ने कहा, “हमारी मुक्ति केवल किसानों के माध्यम से ही हो सकती है। न तो वकील, न डॉक्टर और न ही जमींदार इसे सुरक्षित रख सकते हैं।” इस प्रकार गाँधी जी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे भारतीय राष्ट्रवाद के विकास में संपूर्ण भारतीय जनता को साथ लेकर चलना चाहते थे। 1922 ई० तक गाँधी जी जन नेता बन चुके थे। सामान्यजन गाँधी जी के प्रशंसक थे और उन्हें सम्मानपूर्वक महात्मा जी’ कहते थे। गाँधी जी अन्य नेताओं के समान न तो सामान्य जनसमूह से अलग रहते थे और न ही उनसे अलग दिखते थे।
गाँधी जी सामान्य लोगों की ही भाषा बोलते थे और उनकी ही तरह के वस्त्र पहनते थे। सामान्यजनों के साथ गाँधी जी की पहचान उनके वस्त्रों से विशेष रूप से झलकती थी। उल्लेखनीय है कि अन्य राष्ट्रवादी नेता पाश्चात्य शैली के सूट अथवा भारतीय बन्दगला जैसे औपचारिक वस्त्रों को धारण करते थे। किन्तु गाँधी जी की वेशभूषा अत्यधिक सीधी-सादी थी। वे जनसामान्य के मध्य में एक साधारण-सी धोती में जाते थे।
1921 ई० में दक्षिण भारत की यात्रा के दौरान गाँधी जी ने अपना सिर मॅडवा लिया था और गरीबों के साथ तादात्म्य स्थापित करने के लिए वे सूती वस्त्र पहनने लगे थे। वे प्रतिदिन कुछ समय चरखा चलाने में व्यतीत करते थे। उल्लेखनीय है कि पारम्परिक भारतीय समाज में ऊँची जातियाँ सूतकताई के कार्य को अच्छा नहीं समझती थीं। जनसामान्य के प्रति गाँधी जी का दृष्टिकोण अत्यधिक सहानुभूतिपूर्ण था। उनकी सीधी-सादी जीवनशैली एवं हाथों से काम करने के प्रति उनका लगाव उन्हें जनसामान्य के बहुत निकट ले आया था।