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किसान महात्मा गाँधी को किस तरह देखते थे? - History (इतिहास)

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प्रश्न

किसान महात्मा गाँधी को किस तरह देखते थे?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

किसान गाँधी जी को अपना मसीहा एवं अनेक लोकोपकारी और चमत्कारिक शक्तियों से संपन्न समझते थे। गाँधी जी की चमत्कारिक शक्तियों के विषय में स्थान-स्थान पर अनेक प्रकार की अफ़वाहों का प्रसार हो रहा था। कुछ स्थानों पर जनसामान्य का यह विश्वास बन गया था कि राजा ने उन्हें किसानों के कष्टों को दूर करने तथा उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए भेजा है और उनके पास इतनी शक्ति थी कि वे सभी अधिकारियों के निर्देशों को अस्वीकृत कर सकते थे। कुछ अन्य स्थानों पर गाँधी जी की शक्ति को अंग्रेज बादशाह से भी अधिक बताया गया और यह दावा किया गया कि उनके आगमन से औपनिवेशिक शासक भयभीत होकर स्वतः ही भाग जाएँगे।

इस प्रकार की अफवाहें भी जोर पकड़ने लगीं कि किसी में भी गाँधी जी का विरोध करने की शक्ति नहीं थी और उनका विरोध करने वालों को भयंकर परिणाम भुगतने पड़ते थे। अनेक ग्रामों में यह अफ़वाह थी कि गाँधी जी की आलोचना करने वाले लोगों के घर रहस्यात्मक ढंग से गिर गए थे अथवा खेतों में खड़ी उनकी हरी-भरी फसल बिना किसी कारण के ही नष्ट हो गई थी। भारतीय जनसंख्या के एक विशाल भाग का निर्माण करने वाले किसान गाँधी जी की सात्विक जीवन-शैली तथा उनके द्वारा ग्रहण किए गए धोती और चरखा जैसे प्रतीकों से अत्यधिक प्रभावित थे। किसानों में गाँधी जी ‘गाँधी बाबा’, ‘गाँधी महाराज’ अथवा ‘महात्मा’ जैसे अनेक नामों से प्रसिद्ध थे। वे उन्हें अपना उद्धारक मानते थे और उनका विश्वास था कि गाँधी जी ही उन्हें भू-राजस्व की कठोर दरों तथा ब्रिटिश अधिकारियों की दमनात्मक गतिविधियों से बचा सकते हैं, वे उनकी मान-मर्यादा के रक्षक हैं तथा उनकी स्वायत्तता उन्हें वापस दिलवा सकते हैं।

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गाँधी को समझना
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अध्याय 13: महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन - अभ्यास [पृष्ठ ३७४]

APPEARS IN

एनसीईआरटी History [Hindi] Class 12
अध्याय 13 महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन
अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ ३७४
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