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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

मुझे जोधपुर जाना था। बस आने में देरी थी। अतः बस स्टॉप पर बस के इंतजार में बैठा था। (1) संजाल पूर्ण कीजिए: बस स्टॉप पर दिखाई देने वाले लोगों के कार्य - Hindi [हिंदी]

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

           मुझे जोधपुर जाना था। बस आने में देरी थी। अतः बस स्टॉप पर बस के इंतजार में बैठा था। वहाँ बहुत से यात्रियों का जमघट लगा हुआ था। सभी बातों में मशगूल थे अतः अच्छा-खासा शोर हो रहा था।

           अचानक एक आवाज ने मेरा ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया। एक दस वर्षीय लड़का फटा-सा बैग लटकाए निवेदन कर रहा था - ‘‘बाबू जी, पॉलिश करा लो।’’

           मेरे मना करने पर उसने विनीत मुद्रा में कहा - ‘‘बाबू जी, करा लो। जूते चमका दूँगा। अभी तक मेरी बोहनी नहीं हुई है।’’

           मैं घर से जूते पॉलिश करके आया था अतः मैंने उसे स्पष्ट मना कर दिया।

           वह दूसरे यात्री के पास जाकर विनय करने लगा। मैं उसी ओर की देखने लगा। वह रह-रहकर यात्रियों से अनुनय-विनय कर रहा था- ‘‘बाबू जी, पॉलिश करा लो। जूते चमका दूँगा। अभी तक मेरी बोहनी नहीं हुई है।’’

           मेरे पास ही एक सज्जन बैठे थे। वे भी उस लड़के को बड़े गौर से देख रहे थे। शायद उन्हें उसपर दया आई। उन्होंने उसे पुकारा तो वह प्रसन्न होकर उनके पास आया और वहीं बैठ गया।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए: (2)

(2) कारण लिखिए: (2)

  1. लेखक का लड़के को मना करना - ______
  2. लड़के का प्रसन्न होना - ______

(3) ‘स्वावलंबन का महत्त्व’ इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (3)

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

(1)

(2)

  1. लेखक घर से जूते पॉलिश करके आये थे।
  2. लेखक के पास ही एक सज्जन बैठे थे। शायद उन्हें उसपर दया आई। उन्होंने उसे पुकारा तो वह प्रसन्न होकर उनके पास आया और वहीं बैठ गया।

(3) स्वावलंबन का सीधा मतलब होता है की आत्मनिर्भर होना। इस चीज को मनुष्य उसकी क्षमता और उसके प्रयत्न के अनुसार कार्य करता है। जिसके अंदर ये गुणवत्ता मौजूद होती है वो कभी दुसरे के सहारे नहीं रहता है। वो हमेशा अपने बलबूते पर कोई भी कार्य को आसानी से कर लेता है। स्वावलंबी बनने के लिए अपने इच्छा शक्ति को जड़ से मजबूत व घनघोर परिश्रमी होने की आवयश्कता पड़ती है, तभी कोई व्यक्ति जाकर आत्मनिर्भर बन पाता है। यह एक ऐसी चीज है जो किसी विद्यालय या किसी महान व्यक्ति के उपदेश देने से नहीं आता है। इसके लिए खुद को बदलने की जरुरत पड़ती है। स्वावलंब होना आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। आत्मनिर्भर होने का तात्पर्य होता है पैर पर खड़े होकर कोई काम स्वयं ही करना। उसके लिए किसी वस्तु, कपडा, मकान इत्यादि जैसे जरुरत चीजों के लिए किसी दुसरे पर निर्भर नही होना पड़ता है।

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