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प्रश्न
‘परिश्रम और स्वाभिमान से जिंदगी बिताने में आनंद की प्राप्ति होती है’ इसपर अपने विचार लिखिए।
उत्तर
व्यक्ति के जीवन की सफलता का मूलमंत्र उसका श्रम है। कठोर परिश्रम ही किसी व्यक्ति, परिवार, समाज अथवा राष्ट्र की प्रगति को सुनिश्चित कर सकता है। दुनिया में कोई भी काम ना ही बड़ा और न तो छोटा होता है। कर्म के प्रति की भावना ही उसे महान तथा क्षुद्र बना सकती है। संसार में अनेक ऐसे उदाहरण हैं, जहाँ लोगों की परिश्रमशीलता ने सफलता का शिखर छुआ है। व्यक्ति को स्वाभिमान के साथ ही अपना जीवन जीना चाहिए। वह काम कोई भी करे, उसे स्वयं को हीन नहीं समझना चाहिए। परिश्रम और स्वाभिमान से सुख वैभव और आनंद प्राप्त होता ही है, साथ ही परिश्रमी व्यक्ति समाज और राष्ट्र की प्रगति का बहुत बड़ा आधार बन जाता है।
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लड़के का चेहरा देखकर लोग आश्चर्य करने लगे - ______
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लड़के ने सज्जन के दिए रुपये लौटाए - ______
लिखिए :
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
मुझे जोधपुर जाना था। बस आने में देरी थी। अतः बस स्टॉप पर बस के इंतजार में बैठा था। वहाँ बहुत से यात्रियों का जमघट लगा हुआ था। सभी बातों में मशगूल थे अतः अच्छा-खासा शोर हो रहा था। अचानक एक आवाज ने मेरा ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया। एक दस वर्षीय लड़का फटा-सा बैग लटकाए निवेदन कर रहा था - ‘‘बाबू जी, पॉलिश करा लो।’’ मेरे मना करने पर उसने विनीत मुद्रा में कहा - ‘‘बाबू जी, करा लो। जूते चमका दूँगा। अभी तक मेरी बोहनी नहीं हुई है।’’ मैं घर से जूते पॉलिश करके आया था अतः मैंने उसे स्पष्ट मना कर दिया। वह दूसरे यात्री के पास जाकर विनय करने लगा। मैं उसी ओर की देखने लगा। वह रह-रहकर यात्रियों से अनुनय-विनय कर रहा था- ‘‘बाबू जी, पॉलिश करा लो। जूते चमका दूँगा। अभी तक मेरी बोहनी नहीं हुई है।’’ मेरे पास ही एक सज्जन बैठे थे। वे भी उस लड़के को बड़े गौर से देख रहे थे। शायद उन्हें उसपर दया आई। उन्होंने उसे पुकारा तो वह प्रसन्न होकर उनके पास आया और वहीं बैठ गया। |
(1) संजाल पूर्ण कीजिए: (2)
(2) कारण लिखिए: (2)
- लेखक का लड़के को मना करना - ______
- लड़के का प्रसन्न होना - ______
(3) ‘स्वावलंबन का महत्त्व’ इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (3)