Advertisements
Advertisements
प्रश्न
‘नाश के दुख से कभी दबता नहीं निर्माण का सुख’ इसे अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
संक्षेप में उत्तर
उत्तर
जीवन में अनेक बार ऐसे ठहराव और बाधा का सामना हमें करना पड़ता है कि हमें लगता है कि अब आगे बढ़ना संभव नहीं है, लेकिन इंसान हिम्मत संजोकर फिर आगे बढ़ता है और बढ़ता चला जाता है। मानव जीवन में उतार-चढ़ाव चलता रहता है। आदमी को दुखों से घबराना नहीं चाहिए। उसे डटकर मुश्किलों का सामना करना चाहिए। त्सुनामी, भूकंप, बाढ़ तथा सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएँ आती हैं। मनुष्य का सब कुछ नष्ट हो जाता है। नष्ट हो जाने पर व्यक्ति को दुख तो होता है, किंतु सृजन का सुख तो कुछ और ही होता है। मानव को नाश पर निर्माण को वरीयता देनी चाहिए।
shaalaa.com
दिवस का अवसान
क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
संजाल पूर्ण:
कथन मंडल में रज छा गई।
विविध धेनु विभूषित हो गई।
‘दिवस का अवसान’ कविता के चतुर्थ चरण का भावार्थ लिखिए।
झलकने पुलिनों पर भी लगी। गगन के तल की यह लालिमा। सरि-सरोवर के जल में पड़ी। अरुणता अति ही रमणीय थी।। |