Advertisements
Advertisements
प्रश्न
संजाल पूर्ण:
सारिणी
उत्तर
shaalaa.com
दिवस का अवसान
क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 1.11: दिवस का अवसान - स्वाध्याय [पृष्ठ ४८]
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
‘नाश के दुख से कभी दबता नहीं निर्माण का सुख’ इसे अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
कथन मंडल में रज छा गई।
विविध धेनु विभूषित हो गई।
‘दिवस का अवसान’ कविता के चतुर्थ चरण का भावार्थ लिखिए।
झलकने पुलिनों पर भी लगी। गगन के तल की यह लालिमा। सरि-सरोवर के जल में पड़ी। अरुणता अति ही रमणीय थी।। |