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प्रश्न
नदी, कुएँ स्नानागार और बेजोड़ निकासी व्यवस्था को देखते हुए लखक पाठकों स प्रश्न पूछता है कि क्या हम सिंधु घाटी सभ्यता को जल-सस्कृति कह सकते हैं? आपका जवाब लखक के पक्ष में है या विपक्ष में? तक दें।
उत्तर
यह बिलकुल सत्य है कि नदी, कुएँ, स्नानागार और बेजोड़ निकासी व्यवस्था सिंधु घाटी की विशेष पहचान रही है। लेखक अंत में पाठकों से यह प्रश्न पूछता है कि क्या हम सिंधु घाटी सभ्यता को जल-संस्कृति कह सकते हैं तो मैं यही कहूँगा/कहूँगी कि उस सभ्यता की नकल ही हमने की है। उस सभ्यता का कोई मुकाबला नहीं। आज चंडीगढ़, ब्रासीलिया और इसलामाबाद की नगर योजना पर सिंधु सभ्यता का प्रभाव दिखाई देता है लेकिन यह प्रभाव गहरा नहीं है। सिंधु घाटी के लोगों ने अपनी समझ और दूरदर्शिता का परिचय दिया है। जबकि इन शहरों में समझ तो दिखाई देता है लेकिन दूरदर्शिता नहीं। इसीलिए मैं सिंधु घाटी की सभ्यता को नव्य-संस्कृति के लिए एक आदर्श कहूँगा/कहूँगी।
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