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प्रश्न
‘टूटे-फूटे खडहर, सभ्यता और सस्कृति के इतिहास के साथ-साथ धड़कती जिंदगियों के अनछुए समयों का भी दस्तावेज होते हैं।”-इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
जब कोई सभ्यता या संस्कृति काल के ग्रास में समा जाए तो पीछे टूटे-फूटे खंडहर छोड़ जाती है। इन्हीं टूटे-फूटे खंडहरों की खोज के आधार पर अमुक सभ्यता और संस्कृति के बारे में जानने का प्रयास किया जाता है। सिंधु घाटी की सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यता थी किंतु वह भी एक दिन समाप्त हो गई। अपने पीछे छोड़ गई टूटी-फूटी इमारतों के आधार पर पुरातत्ववेत्ता कहते हैं कि वह एक सुसंस्कृत और विकसित संस्कृति थी, उस समय का समाज उसमें रहने वाले लोग कैसे थे इन सभी के बारे में खंडहरों के अध्ययन से ही जाना जा सकता है। कोई भी खंडहर और नगर में मिले अन्य अवशेषों और चीज़ों के आधार पर उस युग के लोगों के आचार-व्यवहार के बारे में पता चल जाता है। उस समय के लोगों का खान-पान भी यही वस्तुएँ बता देती हैं। इसलिए कहा गया है कि टूटे-फूटे खंडहर सभ्यता और संस्कृति के इतिहास के साथ-साथ धड़कती जिंदगियों के अनछुए समयों का भी दस्तावेज होते हैं।
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