Advertisements
Advertisements
प्रश्न
नीचे लिखा वाक्य पढ़ो। उसमें इस्तेमाल हुए मुहावरे को अपने ढंग से इस्तेमाल करके कुछ और वाक्य बनाओ।
ऐसा लगा जैसे किसी ने चीते का खून चूस लिया हो।
उत्तर
मालिक तो काम करवा-करवाकर मेरा खून चूस लिया है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
स्वतंत्रता के महत्व को लिखिए?
लेखक ने सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएँ बताई हैं?
मुरलीवाले का स्वर सुनकर रोहिणी को क्या स्मरण हो आया?
राय विजयबहादुर के बच्चों ने कौन-सा खिलौना खरीदा?
सही शब्द चुनकर वाक्य पूरा करो।
मैं तैरना चाहता हूँ ______ मुझे तैरना नहीं आता।
पुराने समय से ही अनेक व्यक्तियों ने पुस्तकों को नष्ट करने का प्रयास किया। पाठ में से कोई तीन उदाहरण ढूँढ़कर लिखो।
मिनी ज़ोर-ज़ोर से पुकारने लगी।
तुम्हें सर्दी-गरमी के मौसम में अपने घर के आसपास क्या-क्या दिखाई देता है?
दादा की मृत्यु के बाद लेखक के घर की आर्थिक स्थिति खराब क्यों हो गई थी?
घर पर होनेवाले उत्सवों/समारोहों में बच्चे क्या-क्या करते हैं? अपने और अपने मित्रों के अनुभवों के आधार पर लिखिए।
नदियों और हिमालय पर अनेक कवियों ने कविताएँ लिखी हैं। उन कविताओं का चयन कर उनकी तुलना पाठ में निहित नदियों के वर्णन से कीजिए।
पेट में कीड़े क्यों हो जाते हैं? इनसे कैसे बचा जा सकता है?
बिंबाणु (प्लेटलैट कण) की कमी किस बीमारी में पाई जाती है
'माँ मेरी बाट देखती होगी'-नन्ही चिड़िया बार-बार इसी बात को कहती है। आप अपने अनुभव के आधार पर बताइए कि हमारी जिंदगी में माँ का क्या महत्त्व है?
इस कहानी से आपको किस जीवन-मूल्य का बोध होता है?
पाठ में ‘ठिठियाकर हँसने लगी’, ‘पीछे से धकियाने लगी’ जैसे वाक्य आए हैं। ठिठियाकर हँसने के मतलब का आप अवश्य अनुमान लगा सकते हैं। ठी-ठी-ठी हँसना या ठठा मारकर हँसना बोलचाल में प्रयोग होता है। इनमें हँसने की ध्वनि के एक खास अंदाज को हँसी का विशेषण बना दिया गया है। साथ ही ठिठियाना और धकियाना शब्द में ‘आना’ प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। इस प्रत्यय से फ़िल्माना शब्द भी बन जाता है। ‘आना’ प्रत्यय से बननेवाले चार सार्थक शब्द लिखिए।
कंचे कैसे थे?
क्या आपको कंचे अच्छे लगते हैं? क्या आप उनसे कभी खेले हैं?
मोर-मोरनी के नाम किस आधार पर रखे गए?
अपने प्राणों के बलिदान का अवसर आ गया है। इस वाक्य में "प्राणों का बलिदान देना" मुहावरे का प्रयोग हुआ है।
नीचे मुहावरा दिया गया हैं। इसका अपने वाक्य में प्रयोग करो।
प्राणों की बाजी लगाना