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निम्नलिखित कारकों का अपने वाक्यों में प्रयोग करो। ने ______ को ______ से ______ को ______ से ______ का, की, के ______ में,पर ______ अरे! ______ - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

निम्नलिखित कारकों का अपने वाक्यों में प्रयोग करो।

ने ______
को ______
से ______
को ______
से ______
का, की, के ______
में, पर ______
अरे! ______
सारिणी

उत्तर

ने पूजा ने खाया।
को पूजा ने गौरव को आम दिया।
से गौरव ने चाकू से आम काटा।
को माँ ने बेटे को खाना दिया।
से पूजा स्कूल से घर आई।
का, की, के
  • यह गौरव का घर है।
  • यह पूजा की चप्पल है।
  • यह लड़कों के जूते हैं।
में, पर
  • सीमा बैंक में काम करती है।
  • चिड़िया पेड़ पर बैठी है।
अरे! अरे लड़की! तुम यहाँ क्यों खड़ी हो?
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व्याकरण
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 2.04: साेना और लोहा - साेना और लोहा [पृष्ठ ३९]

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बालभारती Hindi - Sulabhbharati 6 Standard Maharashtra State Board
अध्याय 2.04 साेना और लोहा
साेना और लोहा | Q (२) | पृष्ठ ३९

संबंधित प्रश्न

निम्‍न शब्द का लिंग पहचानकर लिखो 

तार


निम्‍न शब्‍द के पर्यायवाची शब्‍द लिखिए:


शब्‍द-युग्‍म पूरे करते हुए वाक्‍य में प्रयोग कीजिए:

प्रचार


निम्नलिखित वाक्य को पढ़ो और मोटे अक्षर में छपे शब्द पर ध्यान दो, पढ़कर उद्देश्य-विधेय अलग करके लिखो:

हिलामय देश का गौरव है।


निम्नलिखित वाक्य पढ़ो और मोटे और अधोरेखित किये गए शब्द पर ध्यान दो :

शाबाश! इसी तरह साफ-सुथरा आया करो।


निम्न विशेषण शब्द का अपने वाक्य में प्रयोग करके उनका प्रकार लिखो।


उचित विरामचिह्न लगाइए:-

पहले मैंने बगीचा देखा फिर मैं एक टीले पर चढ़ गया और वहाँ से उतरकर सीधा इधर चला आया


निम्न शब्द के तीन पर्यायवाची शब्‍द रिक्‍त स्‍थान में लिखिए:-

शब्द पर्यायवाची शब्द
  खेतिहर      

परिच्छेद पढ़िए और उसमें आए शब्‍दों के लिंग एवं वचन बदलकर लिखिए।

मैं गाँव से शहर पढ़ने आता था। गाँव का मेरा एक मित्र भी था। सावन-भादों की बादलों से ढँकी रात में बीहड़ पानी बरसता है। पूरा सन्नाटा शेर की दहाड़ सरीखा गरज उठता है। छमाक से बिजलियाँ कड़कती हैं। माँ बच्चे को अपने छाती से चिपकाती है। हाँड़ी में उबलते दाल-भात के साथ उसकी उम्‍मीद भी पकती है। उसका श्रम पकता है। अंत में कभी-कभी माँ हाँड़ी में चिपके मुट्ठी भर बचे चावल खाती है। न जाने कहाँ से अपनी आँखों में इतनी तेज चमक पैदा कर लेती है कि भरे पेटवाले की आँखें चौंधियाँ जाती हैं।

उसके त्‍याग और संतान की तृप्ति के पानी से उसकी साध लहलहाती है। बैलगाड़ी में बैठी संतान को छतरी की छाँव करती है।

बस में बच्चा खिड़की के पास बैठा बाहर दृश्यों को देखता है और वह पूरी यात्रा बच्चे को देखती रहती है। सँभालती रहती है। रेल जब बोगदे के भीतर से गुजरती है, तो अनायास उसका हाथ बच्चे की बाँह पर चला जाता है और पिता का सामान पर।



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