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प्रश्न
‘नियम और उपनियमों के ये बंधन टूक-टूक हो जाएँ’ इस पंक्ति द्वारा कवि सूचित करना चाहते हैं...
संक्षेप में उत्तर
उत्तर
"नियम और उपनियमों के ये बंधन टूक-टूक हो जाएँ" इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह भावना व्यक्त कर रहे हैं कि वे सोचते हैं कि नियमों और उपनियमों के कठिन और सख्त बंधन हो गए हैं, जिन्होंने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अवसरों को प्रतिबंधित कर दिया है। "टूक-टूक हो जाएँ" शब्द इसका सुझाव देते हैं कि ये बंधन बहुत प्रतिबंधक हैं और इन्हें तोड़ने का समय आ गया है। यह कवि की ओर से व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सोचने की स्वतंत्रता, और नये दिशाओं की ओर बढ़ने की इच्छा को दर्शाता है। वे नियमों और उपनियमों को सख्ती से मानने का समय पर सवाल उठाते हैं, ताकि वे अपने आप को स्वतंत्रता और स्वाधीनता की ओर बढ़ा सकें।
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विप्लव गान
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संजाल:
'विप्लव गान' कविता के प्रथम चरण का भावार्थ लिखिए।
कवि, कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए, एक हिलोर इधर से आए, एक हिलोर उधर से आए, प्राणों के लाले पड़ जाएँ, त्राहि-त्राहि रव नभ में छाए, नाश और सत्यानाशों का... धुआँधार जग में छा जाए, बरसे आग, जलद जल जाएँ, भस्मसात भूधर हो जाएँ, पाप-पुण्य सदसद भावों की, धूल उड़ उठे दायें-बायें, नभ का वक्षस्थल फट जाए, तारे टूक-टूक हो जाएँ कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए। |