Advertisements
Advertisements
प्रश्न
पद्यांशं पठित्वा निर्दिष्टाः कृतीः कुरुत । (5 तः 4)
कं संजघान कृष्णः का शीतलवाहिनी गङ्गा। के दारपोषणरताः कं बलवन्तं न बाधते शीतम्॥ वृथाभ्रमणकुक्रीडापरपीडापभाषणैः। कालक्षेपो न कर्तव्यो विद्यार्थी वाचनं श्रयेत्॥ आत्मनो मुखदोषेण बध्यन्ते शुकसारिकाः। बकास्तत्र न बध्यन्ते मौनं सर्वार्थसाधनम्॥ यथैव सकला नद्यः प्रविशन्ति महोदधिम्। तथा मानवताधर्म सर्वे धर्माः समाश्रिताः॥ |
(क) पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत। [1]
कृष्णः कं जघान?
(ख) विशेषण-विशेष्ययोः मेलनं कुरुत। [1]
विशेषणम् | विशेष्यम् | |
(1) | सर्वे | नद्यः |
(2) | सकलाः | महोदधिम् |
धर्माः |
(ग) जालरेखाचित्रं पूरयत। [1]
(घ) पद्यांशात् 2 द्वितीयाविभक्त्यन्तपदे चित्वा लिखत। [1]
(च) पूर्वपदम्/उत्तरपदं लिखत। [1]
- आत्मनो मुखदोषेण = ______ + मुखदोषेण।
- यथैव = यथा + ______ ।
आकलन
उत्तर
(क) कृष्णः कंसं जघान।
(ख)
विशेषणम् | विशेष्यम् | |
(1) | सर्वे | धर्माः |
(2) | सकलाः | नद्यः |
(ग)
(घ)
- महोदधिम्
- धर्मा
(च)
- आत्मनो मुखदोषेण = आत्मनः + मुखदोषेण।
- यथैव = यथा + एव।
shaalaa.com
क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?