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प्रथम पाँच पंक्‍तियों का भावार्थ लिखिए। किताबें झॉंकती हैं बंद अलमारी के शीशों से, बड़ी हसरत से तकती हैं । महीनों अब मुलाकातें नहीं होतीं, जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं अब अक्‍सर ........ - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

प्रथम पाँच पंक्‍तियों का भावार्थ लिखिए।

किताबें झाँकती हैं बंद अलमारी के शीशों से,

बड़ी हसरत से तकती हैं ।

महीनों अब मुलाकातें नहीं होतीं,

जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं

अब अक्‍सर ........

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उत्तर

प्रस्तुत कविता में गुलजार ने किताबों के कम हो रहे चलन के बारे में बताया है। उनके अनुसार किताबें अब सिर्फ अलमारी में बंद रहती हैं और उससे बाहर निकलने की हसरत लिए वे अलमारी के शीशे से ताकती रहती हैं। महीने बीत जाते हैं, लेकिन किताबों से मुलाकात नहीं होती है। एक समय था, जब लोग अक्सर शाम का वक्त किताबों के साथ बिता दिया करते थे।

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अध्याय 1.04: किताबें - पाठ के आँगन में [पृष्ठ १४]

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बालभारती Hindi - Lokbharati 9 Standard Maharashtra State Board
अध्याय 1.04 किताबें
पाठ के आँगन में | Q (२) | पृष्ठ १४
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