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प्रश्न
“राज्याश्रय में रहकर साहित्यकार का लेखन कुंठित हो जाता है -'आषाढ़ का एक दिन' नाटक के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए।
उत्तर
'आषाढ़ का एक दिन' नाटक में नाटककार ने भौतिक दर्शन, प्रवृत्ति मार्ग व निवृत्ति मार्ग के घनीभूत द्वंद्द को सफलतापूर्वक चित्रित किया गया है।
नाटक की शुरुआत में ही लेखक अपने मन की बात बताते हैं कि उन्हें आषाढ़ का एक दिन बेहद पसंद है लेकिन स्पष्ट नहीं कर पाते कि यह दिन क्यों पसंद है। उस दिन के व्याख्यायित करते हुए लेखक कहते हैं कि इस दिन बादलों की गोद में बैठकर आराम से ग्रामीण दृश्यों का आनंद लिया जा सकता है लेकिन दूसरी तरफ इस दिन की गर्मी, उमस तथा भूख उलझन में डाल देती है। यह नाटक इस बात को स्पष्ट करता है कि राज्याश्रय में रहकर साहित्यकार का लेखन कुंठित हो जाता है। कालिदास का प्रारंभिक जीवन उनके गाँव में स्वतंत्रता और सरलता से भरा होता है, जहाँ वे अपनी रचनाओं को बिना किसी बाहरी दबाव के स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकते हैं। उनकी रचनाओं में सजीवता और मौलिकता होती है, जो उनकी व्यक्तिगत संवेदनाओं और विचारों का प्रतिबिंब होती है। ऊपरी तौर पर नाटक में कालिदास की कथा को प्रस्तुत किया गया है जिसमें मल्लिका से प्रेम, राज्याश्रम का सुख प्रियंगुमंजरी से विवाह, राजसी सुख, सुख सम्पन्नता, ख्याति आदि सब दर्शाया गया है परन्तु इसके पीछे लेखक ने तनाव, परिस्थितियों से समझौता, घुटन, मानसिक प्रताड़ना आदि को भी दर्शाया है। सभी पात्र पूर्ण होकर भी अपूर्ण ही दिखते हैं। कालिदास की रचनाएँ अब दरबारी जीवन और राजनैतिक आवश्यकताओं के अधीन हो जाती हैं, जिससे उनकी साहित्यिक अभिव्यक्ति पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इस प्रक्रिया में उनकी व्यक्तिगत संवेदनाएँ और स्वतंत्र विचार दब जाते हैं, और उनका लेखन कुंठित हो जाता है।
मल्लिका कालिदास की सफलता के लिए उसे उज्जयिनी भेज देती है। स्वयं विलोम को आत्मसमर्पण करती है परन्तु कालिदास के लिए सदैव उसकी प्रेमिका बनी रहती है। कालिदास मल्लिका से प्रेम तो करता है परन्तु अपनी सफलता के लिए अपने प्रेम भूल आगे बढ़ जाता है। नाटक का प्रारम्भ भी वर्षा से होता है और अंत भी उसी वर्षा की सघन बौछारों में दिखाया गया है। नाटक के आरम्भ में कालिदास व मल्लिका के जीवन में सामाजिक अवमाननाओं, उपेक्षाओं और अपवादों के कारण घुटन है और अंत भी कालिदास के साथ उसी घुटन भरी स्थिति में होता है।
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Read the passage given below carefully and answer the questions that follow using your own words in Hindi.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और अपने शब्दोंका प्रयोग करते हुए दिए गए प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में दीजिए।
कैसोवैरी चिड़िया जंगल में एक पेड़ के कोटर में रहती थी। वह बचपन से ही बाकी चिड़ियों से अलग थी इसलिए बाकी चिड़ियों के बच्चे उसे हमेशा चिढ़ाते थे। कोई कहता, “जब तू उड़ नहीं सकती तो चिड़िया किस काम कीं?", तो कोई उसे पेड़ की डाल पर बैठकर चिढ़ाता, “अरे! कभी हमारे पास भी आ जाया करो। जब देखो जानवरों की तरह नीचे चरती रहती हो", और ऐसा बोलकर सब-के-सब खूब हँसते। कैसोवैरी उनकी बातें सुनकर मन मसोसकर रह जाती पर किसी से कुछ कह नहीं पाती थी। शुरू-शुरू में वह इन बातों का बुरा नहीं मानती थी लेकिन किसी भी चीज की एक सीमा होती है। बार-बार चिढ़ाए जाने से उसका दिल टूट गया। वह उदास बैठ गयी और आसमान की तरफ देखते हुए बोली, “हे ईश्वर तुमने मुझे चिड़िया क्यों बनाया? और बनाया तो मुझे उड़ने की काबिलियत क्यों नहीं दी? देखो सब मुझे कितना चिढ़ाते हैं। अब मैं यहाँ एक पल भी नहीं रह सकती, मैं इस जंगल को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ कर जा रही हूँ।” ऐसा कहते हुए कैसोवैरी चिड़िया थोड़ा आगे बढ़ गई। अभी वह कुछ ही दूर गई थी कि पीछे से एक भारी-भरकम आवाज़ आई-“रुको कैसोवैरी! तुम कहाँ जा रही हो?” आजतक किसी ने भी कैसोवैरी के साथ इतने अच्छे से बात नहीं की थी। उसने आश्चर्य से पीछे गुड़ कर देखा, वहाँ खड़ा जामुन का पेड़ उससे कुछ कह रहा था। “कृपया तुम यहाँ से मत जाओ, हमें तुम्हारी जरूरत है। पूरे जंगल में हम सबसे अधिक तुम्हारी वजह से ही फल-फूल पाते हैं। वह तुम ही हो जो अपनी मजबूत चोंव से फलों को अन्दर तक खाती हो और हमारे बीजों को पूरे जंगल में बिखेरती हो। हो सकता है बाकी चिड़ियों के लिए तुम मायने ना रखती हो लेकिन हम पेड़ों के लिए तुमसे बढ़कर कोई दूसरी चिड़िया नहीं है। मत जाओ, तुम्हारी जगह कोई और नहीं ले सकता।” पेड़ की बातों ने कैसोवैरी के दिल को छुआ। उसकी बातें सुनकर आज पहली बार उसे जीवन में यह एहसास हुआ कि वह इस धरती पर बेकार में मौजूद नहीं है। भगवान ने उसे एक बेहद जरूरी काम के लिए भेजा है और सिर्फ बाकी चिड़ियों की तरह न उड़ पाना कहीं से उसे छोटा नहीं बनाता। आज कैसोवैरी चिड़िया बहुत खुश थी। वह खुशी-खुशी जंगल में लौट गई। कैसोवैरी चिड़िया की तरह ही कई बार हम इंसान भी औरों को देखकर खुद में लघुता का अनुभव करते हैं। हम अपने पास की चीजों को महत्ता न देकर, ये सोचते हैं कि विधाता ने हमें वे चीजें क्यों नहीं दीं, जो दूसरों के पास हैं। ऐसी स्थिति में हम खुद को दीन-हीन और दूसरों को सौभाग्यशाली मानकर विधाता को कोसने लगते हैं। हमें कभी भी बेकार की तुलना में नहीं पड़ना चाहिए। हर एक इंसान अपने आप में अनोखा है और अलग है। हर किसी के अन्दर कोई-न-कोई बात है जो उसे खास बनाती है। हो सकता है कि वह दूसरों के लिए बस एक इंसान हो लेकिन किसी एक के लिए वह पुरी दुनिया हो सकता है। जीवन की महत्ता को समझकर, उसे सकारात्मक सोच का उपहार देकर हम अपने इस अमूल्य जीवन को और बेहतर बना सकते हैं। |
(i) कैसोवैरी चिड़िया सबसे अलग कैसे थी? बाकी चिड़ियों का व्यवहार उसके साथ कैसा था? [3]
(ii) कैसोवैरी को किससे क्या शिकायत थी? उसकी यह शिकायत कैसे दूर हुई? [3]
(iii) हम अपनी जिन्दगी को कैसे बेहतर बना सकते हैं? गद्यांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए। [3]
(iv) निम्नलिखित पंक्तियों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प चुनिए।
“कृपया तुम यहाँ से मत जाओ, हमें तुम्हारी ज़रूरत है। पूरे जंगल में हम सबसे अधिक तुम्हारी वजह से ही फल-फूल पाते हैं।”
- इस कथन के आधार पर जामुन के पेड़ की किन विशेषताओं का पता चलता है? [1]
- नम्रता और प्रेम
- अहंकार और दया
- करुणा और क्रोध
- धैर्य और गर्व
- कैसोवैरी के किस काम की वजह से जामुन का पेड़ फलता-फूलता था? [1]
- उसके जामुन न खाने से
- उसके कोटर में रहने से
- उसके जंगल में बीज बिखेरने से
- उसके न उड़ पाने से
- कैसोवैरी पर जामुन के पेड़ की बातों का क्या प्रभाव पड़ा? [1]
- वह गुस्सा हो गई।
- उसे अपनी पहचान मिली।
- उसने जंगल छोड़ दिया।
- वह उड़ना सीखने लगी।
(v) निम्नलिखित पंक्तियों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प चुनिए:
“पेड़ की बातों ने कैसोवैरी के दिल को छुआ। उसकी बातें सुनकर आज पहली बार उसे जीवन में यह एहसास हुआ कि वह इस धरती पर बेकार में मौजूद नहीं है।”
- 'दिल को छुआ' - पंक्ति से क्या आशय है? [1]
- भाव-विभोर होना।
- मन दुखी होना।
- मन में निराशा उत्पन्न होना।
- मन उदासीन होना।
- “...वह इस धरती पर बेकार में मौजूद नहीं है।"- पंक्ति से कैसोवैरी के मन के किस भाव का पता चलता है? [1]
- उदारता का भाव
- लघुता का भाव
- आत्मीयता का भाव
- आत्मविश्वास का भाव
- 'मौजूद' शब्द गद्यांश में किस अर्थ में प्रयुक्त हुआ है? [1]
- अस्तित्व के सन्दर्भ में
- मायूसी के सन्दर्भ में
- झुँझलाहट के सन्दर्भ में
- प्रताड़ना के सन्दर्भ में
उसने अपने सारे साहस को समेटकर दृढ़ता से कहा-“माँ, मैं कानपुर जाऊँगी।
- उक्त कथन से संबंधित पाठ और उसके लेखक का नाम लिखिए। [1]
- यह कथन किसने कहा हैं? वह कानपुर क्यों जाना चाहती है? [2]
- इस कथन के पीछे वक्ता का क्या उद्देश्य था? आप किस आधार पर कहेंगे कि वक्ता ने उचित कदम उठाया? [2]
- स्पष्ट कीजिए कि स्वतंत्रता प्राप्ति के आन्दोलन में वक्ता का त्याग भी किसी देशभक्त से कम नहीं था? [5]
“बहुत है बहुत है दिवाकर!” कृतज्ञता-गद्गद स्वर में मैंने कहा, यह हो जाए दिवाकर, तो मेरा उद्घार हो जाएगा। तू नहीं जानता मैं कितना परेशान हूँ। घर में एक पल को चैन नहीं मिलता...। |
- वक्ता कौन है? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए। [1]
- दिवाकर कौन है? वह वक्ता को क्या काम दिलवा रहा था? [2]
- वक्ता की इस पर क्या प्रतिक्रिया थी? [2]
- “तू नहीं जानता मैं कितना परेशान हूँ। घर में एक पल को चैन नहीं मिलता......।" इस कथन के आलोक में वक्ता के घर की स्थिति का वर्णन कीजिए। [5]
राजेन्द्र यादव ने समकालीन संदर्भों एवं समस्याओं का मंथन करते हुए 'सारा आकाश' उपन्यास की रचना की है। समर एक ऐसा पात्र है जिसका चरित्रांकन यथार्थवाद के धरातल पर किया गया है। उक्त कथन को ध्यान सें रखकर समर का चरित्र चित्रण कीजिए।
'सारा आकाश' केवल समर और प्रभा की ही कथा नहीं है बल्कि इसके माध्यम से लेखक ने पारिवारिक तथा सामाजिक समस्याओं को भी उजागर किया है। उपन्यास के आधार पर इस कथन की व्याख्या कीजिए। साथ ही यह भी लिखिए कि आप इस कथन से कितना सहमत हैं और क्यों?
“उनके प्रसंग में मेरी बात कहीं नहीं आती। मैं अनेकानेक साधारण व्यक्तियों में से हूँ। वे असाधारण हैं। उन्हें जीवन में असाधारण का ही साथ चाहिए था। सुना है राज-दुहिता बहुत विदुषी हैं।”
- प्रस्तुत कथन के वक्ता और श्रोता कौन हैं? [1]
- उक्त कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए। [2]
- “वक्ता ने असाधारण' किसे कहा और क्यों? [2]
- उक्त संवाद के आलोक में वक्ता के चारित्र की विशेषताएँ लिखिए। [5]
'कालिदास जहाँ एक तरफ अप्रतिम प्रतिभा के स्वामी हैं, तो वहीं दूसरी तरफ उनके स्वभाव में दुर्बलताओं को भी देखा गया है।` - इस कथन को ध्यान में रखते हुए कालिदास का चरित्र-चित्रण कीजिए।