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प्रश्न
रवींद्रनाथ टैगोर जी की किसी अनुवादित कविता/कहानी का आशय समझते हुए वाचन कीजिए।
उत्तर
मैं एक रवींद्रनाथ टैगोर की कविता "Where the Mind is Without Fear" का एक अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह कविता उनके उपनिषदी बांधु (Upanishadic) विचारों को सार्थक रूप से व्यक्त करती है। और स्वतंत्रता संग्राम के समय के रूप में भी प्रसिद्ध है।
जहां मन निर्भीक हो और सिर ऊँचा रहे,
जहां ज्ञान मुक्त हो,
जहां दुनिया को टुकड़ों में नहीं बाँटा गया हो,
अंगुलियों की छोटी सी दीवारों से,
जहां शब्द सच्चाई की गहराईयों से निकलें,
जहां अविरत प्रयास पूर्णता की दिशा में हो,
जहां तर्क की स्पष्ट धारा अपनी राह नहीं खो चुकी है,
मृत आदत की बेहद बेकार रेगिस्तान में,
जहां मन तुम्हारे माध्यम से आगे बढ़ा रहा है,
सदैव बढ़ती विचार और क्रिया की दिशा में,
उस स्वतंत्रता के स्वर्ग में, मेरे पिताजी, मेरा देश जागरूक हो।
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