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साझेदार के प्रवेश के समय परिसंपत्तियों और दायित्वों के पुर्नमुल्यांकन की आवश्यकता क्यों होती है? - Accountancy (लेखाशास्त्र)

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प्रश्न

साझेदार के प्रवेश के समय परिसंपत्तियों और दायित्वों के पुर्नमुल्यांकन की आवश्यकता क्यों होती है?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

एक नए साझेदार के प्रवेश के समय, कुछ गैर-अभिलेखित परिसंपत्तियों एवं दायित्व भी फर्म में हो सकते हैं। इनको भी फर्म की लेखा पुस्तकों में लाना होगा। इस उद्देश्य के लिए फर्म पुनर्मूल्यांकन खाता तैयार करती है। प्रत्येक परिसंपत्ति या दायित्व पर लाभ या हानि को इस खाते में हस्तांतरित किया जाता है तथा अंत में इसके शेष को पुराने साझेदारों के पूँजी खातों में उनके पुराने लाभ विभाजन अनुपात में हस्तांतरित करते हैं। दूसरे शब्दों में पुनर्मूल्यांकन खाते को प्रत्येक परिसंपत्ति के मूल्य में वृद्धि पर तथा दायित्त्व में कमी होने पर जमा किया जाएगा क्योंकि यह एक अभिलाभ है और परिसंपत्ति के मूल्य में कमी तथा दायित्त्व में वृद्धि होने पर नाम किया जाएगा क्योंकि यह एक हानि है।

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परिसंपत्तियों का पुनर्मूल्यांकर और दायित्वों का पुनर्निर्धारण
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अध्याय 3: साझेदारी फर्म का पुनर्गठन : साझेदार का प्रवेश - अभ्यास के लिए प्रश्न [पृष्ठ १६८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Accountancy - Not-for-Profit Organisation and Partnership Accounts [Hindi] Class 12
अध्याय 3 साझेदारी फर्म का पुनर्गठन : साझेदार का प्रवेश
अभ्यास के लिए प्रश्न | Q 6. | पृष्ठ १६८

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क्या आप यह उचित समझते हैं कि साझेदार के प्रवेश के समय परिसंपत्तियों एवं दायित्वों का पुनर्मुल्यांकन किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी बताएँ इसका लेखांकन व्यवहार क्या होगा?


पुनर्मूल्यांकन के पश्चात फर्म की परिसंपत्तियों एवं दायित्व किस् मूल्य पर फर्म की पुस्तकों में दर्शाये जाते हैं। काल्पनिक तुलन पत्र की सहायता से समझाएँ।


ख्याति के मूल्य की गणना पाँच वर्षो के औसत लाभ के 4 वर्षों के क्रय के आधार पर करें। पिछले पाँच वर्षो का लाभ इस प्रकार है:

 

राशि (रु.)

2012 40,000
2013 50,000
2014 60,000
2015 50,000
2016 60,000

व्यवसाय में विनियोजित पूँजी 2,00,000 रुपये है। फर्म की पूँजी पर प्रत्याय की दर 15% है। वर्ष 2016-17 के दौरान फर्म में 48,000 रु. का लाभ अर्जित किया। ख्याति की गणना अधिलाभ के 3 वर्षो के क्रम के आधार पर करें।


नीचे दिया गया तुलन पत्र अरूण, बबलू और चेतन का है जो क्रमशः `6/14`, `5/14` और `3/14` के अनुपात में लाभ व हानि का विभाजन करते हैं।

दायित्व

 

राशि
(रु.)

परिसंपन्तियाँ राशि
(रु.)

लेनदार

  9,000 भूमि और भवन  24,000

देय विपत्र

  3,000 फ़र्नीचर 3,500

पूँजी खात:

   

स्टॉक

14,000

अरूण

19,000 43,000

देनदार

12,600

बबलू

16,000

रोकड़

900

चेतन

8,000

 

 

 

  55,000

 

55,000

वे दीपक को लाभ में 1/8 भाग के लिए निम्न शर्तों पर साझेदारी फर्म में प्रवेश देते हैं:

  1. दीपक 4,200 रुपये ख्याति और 7,000 रुपये पूँजी के रूप में लाएगा।
  2. फ़र्नीचर में 12% की दर से कमी आएगी।
  3. स्टॉक में 10% की दर से कमी आएगी।
  4. 5% की दर से संदिग्ध ऋणों पर प्रावधान बनाया जाएगा।
  5. भूमि और भवन में 31,000 रुपये की वृद्धि होगी।
  6. समस्त समायोजनों के पश्चात पुराने साझेदारों के पूँजी खातों को (जो पुराने अनुपात में लाभों का विभाजन करेंगें) दीपक द्वारा व्यवसाय में लगाई गई पूँजी के आधार पर समायोजित किया जाएगा, अर्थात पुराने साझेदारों द्वारा वास्तविक धनराशि लेकर आना अथवा आहरण, जैसी भी स्थिति हो।
    रोकड़ खाता, लाभ व हानि समायोजन खाता (पुनर्मूल्यांकन खाता) और नई फर्म का प्रारंभिक तुलन पत्र तैयार करें।

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