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साझेदारी की प्रमुख विशिष्टताओं की व्याख्या करें। - Accountancy (लेखाशास्त्र)

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प्रश्न

साझेदारी की प्रमुख विशिष्टताओं की व्याख्या करें।

दीर्घउत्तर

उत्तर

साझेदारी की प्रमुख विशिष्टताएँ निम्नलिखित हैं -

  1. दो या दो से अधिक व्यक्ति - साझेदारी गठन में एक समान लक्ष्य के साथ कम से कम दो व्यक्तियों को साथ आना चाहिए। दूसरे शब्दों में एक फर्म के गठन में कम से कम दो साझेदार हो सकते हैं। हालाँकि यहाँ पर एक फर्म का गठन करने के लिए व्यक्तियों की अधिकतम संख्या की एक सीमा है।
  2. अनुबंध या समझौता - साझेदारी दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच अनुबंध या समझौते का ही परिणाम होती है जो व्यवसाय चलाते व लाभ -हानि बाँटते हैं। अतः व्यवसाय चलाने तथा आपसी संबंधों के लिए समझौता (अनुबंध) साझेदारों के बीच एक आधार होता है। यह आवश्यक नहीं है कि साझेदारों के बीच समझौता लिखित रूप में हो। एक मौखिक समझौता भी वैध है लेकिन किसी भी विवाद से बचने के लिए, यह प्राथमिकता दी जाती है कि साझेदार एक लिखित समझौता करें।
  3. व्यवसाय - समझौता किसी व्यवसाय को चलाने के लिए किया जाना चाहिए। किसी परिसंपत्ति मात्र के सह-स्वामित्व से स्वतः साझेदारी का गठन नहीं हो जाता है। उदाहरण के लिए, यदि रोहित एवं सचिन संयुक्त रूप से एक भू-भाग खरीदते हैं तो वे उस परिसंपत्ति के संयुक्त रूप से प्लाट्स के मालिक हैं, साझेदार नहीं। लेकिन यदि वे यह कार्य लाभ कमाने के लिए करते हैं और लाभ के लिए ज़मीन को खरीदते व बेचते हैं तो उन्हें साझेदार खा जाएगा।
  4. लाभ का विभाजन - साझेदारी या भागीदारी का एक अन्य महत्त्वपूर्ण तत्त्व यह है कि साझेदारों के बीच समझौता निश्चित रूप से व्यवसाय के लाभों एवं हानियों को बाँटने के लिए होना चाहिए। यद्यपि साझेदारी अधिनियम के अंतर्गत परिभाषा के विवरण में साझेदारी को उन लोगों के बीच संबंध के रूप में बताया गया है जो व्यवसाय के लाभों को बाँटने के लिए सहमत होते हैं, जिसमें हानि भी नकारात्मक लाभ के रूप में लागु होती है। अतः लाभों की भागीदारी के साथ-साथ हानियों की भागीदारी भी महत्त्वपूर्ण है।
  5. साझेदारी के उत्तरदायित्व - प्रत्येक साझेदार संयुक्त रूप दूसरे साझेदारों के साथ तथा स्वतंत्र रूप से भी, फर्म के सभी कार्यों के लिए उत्तरदायी होता है, जब तक कि वह एक साझेदार है। केवल यही नहीं, एक साझेदार के एक फर्म के लिए असीमित उत्तरदायित्व होते हैं। अतः फर्म के कामों के लिए एक साझेदार के एक फर्म के लिए असीमित उत्तरदायित्व होते हैं। अतः फर्म के कामों के लिए एक साझेदार की जिम्मेदारी संयुक्त रूप से संबद्ध होती हैं तथा उसकी परिसम्पत्तियाँ भी फर्म के ऋण चुकाने हेतु आबद्ध होती हैं।
  6. पारस्परिक अभिकरण - साझेदारी सभी की ओर से कार्य करते हुए सभी या उनमें से किसी एक द्वारा की जा सकती है। इसका अर्थ है कि एक फर्म के सभी भागीदार व्यवसाय की गतिविधियों में भाग लेने के लिए समान रूप से हकदार हैं या उनमें से कोई एक जो सभी की ओर से कार्य कर रहा है। प्रत्येक साथी दूसरों के लिए एक एजेंट के रूप में कार्य करता है और अपने कार्य से दूसरों को बांधता है और बदले में दूसरों के द्वारा अपने कार्य से बाध्य होता है। 
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साझेदारी की प्रकृति
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अध्याय 2: साझेदारी लेखांकन - आधारभूत अवधारणाएँ - अभ्यास के लिए प्रश्न [पृष्ठ १०४]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Accountancy - Not-for-Profit Organisation and Partnership Accounts [Hindi] Class 12
अध्याय 2 साझेदारी लेखांकन - आधारभूत अवधारणाएँ
अभ्यास के लिए प्रश्न | Q 1. b. | पृष्ठ १०४

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