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सामाजिक विज्ञान में विशेषकर समाजशास्त्र जैसे विषय में ‘वस्तुनिष्ठता’ के अधिक जटिल होने के क्या कारण हैं? - Sociology (समाजशास्त्र)

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प्रश्न

सामाजिक विज्ञान में विशेषकर समाजशास्त्र जैसे विषय में ‘वस्तुनिष्ठता’ के अधिक जटिल होने के क्या कारण हैं?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

वस्तुनिष्ठता का अर्थ है- बिना व्यक्तिगत मनोवृत्तियों, विचारों, सनक और भ्रांति के प्रभावित हुए तटस्थ होकर वस्तुओं का अध्ययन करना। वस्तुनिष्ठता का सरोकार उस स्थिति से है जहाँ यदि दो या दो से अधिक व्यक्ति किसी परिघटना का प्रेक्षण करते हैं और उसके प्रति अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हैं, तो इसे वस्तुनिष्ठता की संज्ञा दी जा सकती है।

  • समाजशास्त्र में वस्तुनिष्ठता का अभाव है और इसका कारण यह है कि समाजशास्त्री जो समाज के किसी व्यक्ति के संबंध में अनुसंधान करता है, वह स्वयं इसका एक भाग है। यह पूर्णत: स्वभाविक है कि उसका अपना पूर्वाग्रह होंगे जो उसके विचारों, मूल्यों, अभिवृत्तियों, परिपाटियों, प्रथाओं और पारिवारिक परंपराओं से प्रभावित होंगे।
  • समाजशास्त्र में वस्तुनिष्ठता के अन्य कारण विषय-वस्तु की है। सामाजिक परिघटनाएँ अस्पष्ट एवं जटिल हैं। बहुआयाम और बहुआकृति हैं, जिनका मापन पारंपरिक मानकों द्वारा संभव नहीं है। सामाजिक विज्ञानों में विशेषतः समाजशास्त्र जैसे विषय में ‘वस्तुनिष्ठता’ के जटिल होने का यही कारण है।
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कुछ पद्धतिशास्त्रीय मुद्दे
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अध्याय 5: समाजशास्त्र-अनुसंधान पद्धतियाँ - अभ्यास [पृष्ठ ११५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Sociology [Hindi] Class 11
अध्याय 5 समाजशास्त्र-अनुसंधान पद्धतियाँ
अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ ११५
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