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प्रश्न
वस्तुनिष्ठता को प्राप्त करने के लिए समाजशास्त्री को किस प्रकार की कठिनाइयों और प्रयत्नों से गुज़रना पड़ता है?
उत्तर
सामाजिक वैज्ञानिक होने के कारण समाजशास्त्री अपने निष्कर्षों का आधार ‘क्या होना चाहिए’ या कल्पना, सामान्य ज्ञान या अपने अवबोधन (Perception) एवं अनुभवों को नहीं मानते हैं। समाजशास्त्री सामाजिक तथ्यों की प्राप्ति के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों का प्रयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, सामाजिक परिघटनाओं का अध्ययन; जैसे- भारत में संयुक्त परिवार की संरचना को एकल परिवार में परिवर्तन।
समाजशास्त्री अपने व्यक्तिगत ज्ञान और अनुभवों पर निर्भर नहीं करते हैं। इसके विपरीत विवाद की वास्तविकता की खोज के लिए वे सर्वेक्षण पद्धति का प्रयोग करते हैं। विषय की वस्तुनिष्ठता की प्राप्ति के लिए समाजशास्त्री-सुव्यवस्थित अनुसंधान पद्धतियों का अनुकूलन करते हैं जिसके निम्नलिखित अभिलक्षण हैं:
- वैज्ञानिक कार्यप्रणाली का प्रयोग: समाजशास्त्री सुव्यवस्थित और वस्तुनिष्ठ प्रविधि का प्रयोग करते हुए अनुसंधान करते हैं। वे सांख्यिकीय पद्धतियों का प्रयोग करते हैं; जैसे- प्रेक्षण, सामाजिक सर्वेक्षण, समाजमिति (Sociometry) और व्यक्ति अध्ययन इत्यादि।
- ‘क्या होना चाहिए’ की अपेक्षा ‘क्या है’ पर बल दिया जाता है।
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