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प्रश्न
साप्ताहिक बाज़ारों में सामान सस्ते दामों में क्यों मिल जाता है?
उत्तर
साप्ताहिक बाज़ारों में बहुत-सी चीजों सस्ते दामों पर मिल जाती हैं। ऐसा इसलिए कि जो पक्की दुकानों होती हैं। उन्हें अपनी दुकानों के कई तरह के खर्चे जोड़ने होते हैं। उन्हें दुकानों का किराया, बिजली का बिल, सरकारी शल्क आदि देना पड़ता है। इन दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों की तनख्वाह भी इन्हीं खर्ची में जोड़नी होती हैं। साप्ताहिक बाजारों में बेचीं जाने वाली चीजों को दुकानदार अपने घरों में ही जमा करके रखते हैं। इन दुकानदारों के घर के लोग अक्सर इनकी सहायता करते हैं, जिससे इन्हें अलग से कर्मचारी नहीं रखने पड़ते। साप्ताहिक बाज़ार में एक ही तरह के सामानों के लिए के दुकानें होती हैं, जिससे उनमें आपस में प्रतियोगिता भी होती है। यदि एक दुकानदार किसी वस्तु के लिए अधिक कीमत माँगता है, तो लोगों के पास यह विकल्प होता है कि वे अलगी दुकानों पर व्ही सामान देख लें, जहाँ संभव है कि वही वस्तु कम कीमत में मिल जाए। ऐसी स्थितियों में खरीदारों के पास यह अवसर भी होता है कि वे मोल-तोल करके भाव कम करवा सकें।
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एक उदाहरण देकर समझाइए कि लोग बज़ारों में कैसे मोल-तोल करते हैं? क्या आप ऐसी स्थिति के बारे में सोच सकते हैं, जहाँ मोल-तोल करना अन्यायपूर्ण होगा?
निम्न तालिका के आधार पर एक साप्ताहिक बाज़ार और एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की तुलना करते हुए उनका अंतर स्पष्ट कीजिए।
बाज़ार | बेची जाने वाली वस्तुओं के प्रकार | वस्तुओं का मूल्य | विक्रेता | ग्राहक |
साप्ताहिक बाज़ार | ||||
शॉपिंग कॉम्प्लेक्स |