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प्रश्न
।। स्नेह ही स्नेह का पुरस्कार है।।
दीर्घउत्तर
उत्तर
यह कहावत बताती है कि सच्चा प्रेम या स्नेह किसी इनाम या बदले की उम्मीद से नहीं किया जाता। जब आप किसी से निःस्वार्थ प्रेम करते हो, तो उसका सबसे बड़ा पुरस्कार भी वही प्रेम होता है। यानी अगर आपके स्नेह के बदले में आपको स्नेह मिल गया, तो उससे बढ़कर कोई उपहार नहीं।
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