हिंदी
महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

संजाल पूर्ण कीजिए : कोठरी के बाहर से शामनाथ ने देखा - Hindi [हिंदी]

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प्रश्न

संजाल पूर्ण कीजिए : 

 

सारिणी

उत्तर

कोठरी के बाहर से शामनाथ ने देखा :

  • माँ दीवार के साथ एक चौकी पर बैठी थीं |
  • दुपट्टे में मुँह-सिर लपेटे हुए थीं |
  • वे माला जप रही थीं |
  • वे बेटे के साहब की अगवानी के लिए होने होने वाली तैयारी देख रही थीं |
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चीफ की दावत
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अध्याय 2.02: चीफ की दावत - स्‍वाध्याय [पृष्ठ ६७]

APPEARS IN

बालभारती Hindi - Kumarbharati 10 Standard SSC Maharashtra State Board
अध्याय 2.02 चीफ की दावत
स्‍वाध्याय | Q (१) | पृष्ठ ६७

संबंधित प्रश्न

कारण लिखिए : 

माँ ने गीत सुनाया - ______ 


लिखिए : 


सूचना के अनुसार परिवर्तन करके पुनः लिखिए :  


‘वृद्धों काे दया नहीं स्नेहभरा व्यवहार चाहिए’, इसपर अपने विचार लिखिए।


कृतियाँ पूर्ण कीजिए : 

मेम साहब को पसंद आईं चीजें :

  • ______
  • ______  

कृतियाँ पूर्ण कीजिए : 

मेम साहब की पोशाक : 

  • ______
  • ______   

कारण लिखिए : 

शामनाथ क्रोधित हो उठे - ______ 


कारण लिखिए : 

माँ ने फुलकारी बनाने के लिए हाँ कर दी - ______


कारण लिखिए : 

माँ को उनकी सहेली के घर भेजना पसंद न था - ______


निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

           शामनाथ की पार्टी सफलता के शिखर चूमने लगी। कहीं कोई रुकावट न थी, कोई अड़चन न थी। मेम साहब को परदे पसंद आए थे, सोफा कवर का डिजाइन पसंद आया था, कमरे की सजावट पसंद आई थी। इससे बढ़कर क्‍या चाहिए? साहब तो चुटकुले और कहानियाँ कहने लग गए थे। दफ्तर में जितना रोब रखते थे, यहाँ पर उतने ही दोस्‍तपरवर हो रहे थे और उनकी स्‍त्री, काला गाउन पहने, गले में सफेद मोतियों का हार, सेंट और पावडर की महक से ओत-प्रोत, कमरे में बैठी सभी देशी स्‍त्रियों की आराधना का केंद्र बनी हुई थीं। बात-बात पर हँसतीं, बात-बात पर सिर हिलातीं और शामनाथ की स्‍त्री से तो ऐसे बातें कर रहीं थीं, जैसे उनकी पुरानी सहेली हो।

           इसी रौ में साढ़े दस बज गए। वक्‍त कब गुजर गया पता ही न चला।

           आखिर सब लोग खाना खाने के लिए उठे और बैठक से बाहर निकले। आगे-आगे शामनाथ रास्‍ता दिखाते हुए, पीछे चीफ और दूसरे मेहमान।

           बरामदे में पहुँचते ही शामनाथ सहसा ठिठक गए। जो दृश्य उन्होंने देखा, उससे उनकी टाँगें लड़खड़ा गईं, बरामदे में ऐन कोठरी के बाहर माँ अपनी कुर्सी पर ज्‍यों-की-त्‍यों बैठी थीं।

(1) उत्तर लिखिए: (2)

(2) लिखिए: (2)

(3) ‘समय किसी के लिए रुकता नहीं’ इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (3)


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