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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

‘वृद्धों काे दया नहीं स्नेहभरा व्यवहार चाहिए’, इसपर अपने विचार लिखिए। - Hindi [हिंदी]

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प्रश्न

‘वृद्धों काे दया नहीं स्नेहभरा व्यवहार चाहिए’, इसपर अपने विचार लिखिए।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

हमारे समाज में वृद्ध लोगों को दोयम दर्जे के व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। देश में तेजी से सामाजिक परिवर्तनों का दौर चालू है और इस कारण वृद्धों की समस्याएं विकराल रूप धारण कर रही हैं। परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है। मनुष्य भी इस परिवर्तन का अपवाद नहीं है। जन्म से लेकर मृत्यु तक वह कई परिवर्तनों से गुजरता है। मनुष्य का पूरा जीवन अपरिपक्वता से परिपक्वता की और एक यात्रा है। वृद्धावस्था आते ही मनुष्य की इंद्रियाँँ शिथिल होने लगती है। नव-युवकों को या नवीन पीढ़ी को चाहिए कि वह अपने बुजुर्गों का सम्मान करें क्योंकि बुजुर्ग एक तो उम्र से बड़े होते हैं। दूसरा उनका अनुभव भी बड़ा होता है जिसे ध्यान में रखते हुए उसे चाहिए कि वह अपने से बड़े-बूढ़ों का सदैव सम्मान करें। उन्होंने उम्र के कई पड़ाव पार किये है। हमारे समाज में हमारे ही बुजुर्ग एकाकी रहने को विवश हैं उनके साथ उनके अपने बच्चे नहीं हैं। गावों में तो स्थिति फिर भी थोड़ी ठीक है लेकिन शहरों में तो स्थिति बिलकुल भी विपरीत है। ज्यादातर बुजुर्ग घर में अकेले ही रहते हैं, और जिनके बच्चे उनके साथ हैं वो भी अपने अपने कामों में इस हद तक व्यस्त हैं की उनकेपास अपने माता – पिता से बात करने के लिए समय ही नहीं है। बढ़ती उम्र की इस अवस्था में वे नवीन पीढ़ी से सहयोग सहदयता की अपेक्षा रखते हैं। यह उनका हक़ है, अतः उन्हें आदर और सम्मान दिया जाना चाहिए। वे अग्रिम पीढ़ी के लिए दया के पात्र कतई नहीं है।

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चीफ की दावत
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अध्याय 2.02: चीफ की दावत - सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए [पृष्ठ ६४]

APPEARS IN

बालभारती Hindi - Kumarbharati 10 Standard SSC Maharashtra State Board
अध्याय 2.02 चीफ की दावत
सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए | Q (४) | पृष्ठ ६४

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कारण लिखिए : 

माँ ने गीत सुनाया - ______ 


लिखिए : 


लिखिए : 

 


सूचना के अनुसार परिवर्तन करके पुनः लिखिए :  


संजाल पूर्ण कीजिए : 

 



कारण लिखिए : 

माँ ने फुलकारी बनाने के लिए हाँ कर दी - ______


कारण लिखिए : 

माँ को उनकी सहेली के घर भेजना पसंद न था - ______


कारण लिखिए : 

माँ चूड़ियाँ नहीं पहन सकतीं - ______ 


निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

           शामनाथ की पार्टी सफलता के शिखर चूमने लगी। कहीं कोई रुकावट न थी, कोई अड़चन न थी। मेम साहब को परदे पसंद आए थे, सोफा कवर का डिजाइन पसंद आया था, कमरे की सजावट पसंद आई थी। इससे बढ़कर क्‍या चाहिए? साहब तो चुटकुले और कहानियाँ कहने लग गए थे। दफ्तर में जितना रोब रखते थे, यहाँ पर उतने ही दोस्‍तपरवर हो रहे थे और उनकी स्‍त्री, काला गाउन पहने, गले में सफेद मोतियों का हार, सेंट और पावडर की महक से ओत-प्रोत, कमरे में बैठी सभी देशी स्‍त्रियों की आराधना का केंद्र बनी हुई थीं। बात-बात पर हँसतीं, बात-बात पर सिर हिलातीं और शामनाथ की स्‍त्री से तो ऐसे बातें कर रहीं थीं, जैसे उनकी पुरानी सहेली हो।

           इसी रौ में साढ़े दस बज गए। वक्‍त कब गुजर गया पता ही न चला।

           आखिर सब लोग खाना खाने के लिए उठे और बैठक से बाहर निकले। आगे-आगे शामनाथ रास्‍ता दिखाते हुए, पीछे चीफ और दूसरे मेहमान।

           बरामदे में पहुँचते ही शामनाथ सहसा ठिठक गए। जो दृश्य उन्होंने देखा, उससे उनकी टाँगें लड़खड़ा गईं, बरामदे में ऐन कोठरी के बाहर माँ अपनी कुर्सी पर ज्‍यों-की-त्‍यों बैठी थीं।

(1) उत्तर लिखिए: (2)

(2) लिखिए: (2)

(3) ‘समय किसी के लिए रुकता नहीं’ इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (3)


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