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संज्ञानात्मक अधिगम के विभिन्न रूपों की व्याख्या कीजिए। - Psychology (मनोविज्ञान)

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प्रश्न

संज्ञानात्मक अधिगम के विभिन्न रूपों की व्याख्या कीजिए।

दीर्घउत्तर

उत्तर

  1. संज्ञानात्मक अधिगम -
    कुछ मनोवैज्ञानिक अधिगम को उन संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं के रूप में देखते हैं जो अधिगम, के मूल में होती हैं। मनोवैज्ञानिकों ने अधिगम के ऐसे उपागम विकसित किए हैं जो उन प्रक्रिओं पर फोकस करते हैं जो अधिगम करते समय घटित होती हैं, न कि केवल S-R या S-R संबंधों पर ध्यान केंद्रित करके जैसा कि प्राचीन एवं क्रियाप्रस्तुत अनुबंधन में किया जाता है। अतः संज्ञानात्मक अधिगम में सीखने वाले व्यक्ति के कार्यकलापों के स्थान पर उसके ज्ञान में परिवर्तन आता है। अंतर्दृष्टी अधिगम एवं अव्यक्त अधिगम में इस प्रकार का अधिगम दिखाई देता है।
  2. अंतर्दृष्टी अधिगम -
    कोहलर ने अधिगम का ऐसा प्रतिरूप प्रदर्शित किया जिसकी व्याख्या अनुबंधन के आधार पर सरलता से नहीं की जा सकती। उन्होंने चिम्पैंजी पर अनेक प्रयोग किए, जिसमे चिम्पैंजी को जटिल समस्याओं पर समाधान करना था। कोहलर ने चिम्पैंजी को एक बंद खेल क्षेत्र में रखा जहाँ भोजन था, लेकिन चिम्पैंजी की पहुँच के बाहर था। इस खेल क्षेत्र में कुछ उपकरण; जैसे डंडे तथा बॉक्स भी रख दिए गए थे। चिम्पैंजी ने तेजी से बॉक्स पर खड़े होना या डंडे से भोज्य पदार्थ को अपनी ओर खिसकना सीख लिया। इस प्रयोग में अधिगम प्रलय त्रुटि तथा प्रबलन के प्रीनमस्वरूप घटित नहीं हुआ, बल्कि अकस्मात अंतर्दृष्टी दीप्ति द्वारा घटित हुआ। चिम्पैंजी कुछ समय तक खेल क्षेत्र में घूमता रहा, फिर एकाएक एक बक्से पर खड़ा हो जाता जो कि एक डंडा उठाकर केले पर मारता, जो की सामान्यतः उनकी पहुँच के बाहर ऊँचाई पर थे। चिम्पैंजी ने जो अधिगम प्रदर्शित किया उसे कोहलर ने अंतर्दृष्टी अधिगम कहा। यह ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी समस्या का समाधान एकाएक सामने आ जाता है।
    अंतर्दृष्टी अधिगम के एक सामान्य प्रयोग में एक समस्या प्रस्तुत की जाती है, उसके पश्चात कुछ समय तक प्रगति का आभास नहीं होता, फिर अंत में एकाएक समस्या समाधान उत्पन्न होता है। अंतर्दृष्टी अधिगम में अचानक समाधान प्राप्त होना अनिवार्य है। एक बार समाधान मिल जाने पर, अगली बार समस्या उपस्थित होने पर उसकी पुनरावृत्ति तत्काल की जा सकती है। अतः यह स्पष्ट है कि जो अधिगत किया गया है वह उद्दीपकों तथा अनुक्रियाओं के मध्य अनुबंधित साहचर्यों का विशिष्ट समूह नहीं है, बल्कि साधन तथा साध्य के मध्य एक संज्ञानात्मक संबंध है। इसके परिणामस्वरूप अंतर्दृष्टी अधिगम का सामान्यीकरण अन्य मिलती हुई समस्याओं की परिस्थितियों में भी हो सकता है।
  3. अव्यक्त अधिगम -
    एक अन्य प्रकार से संज्ञानात्मक अधिगम को अव्यक्त अधिगम कहते हैं। अव्यक्त अधिगम में एक नवीन व्यवहार सीख लिया जाता है, किंतु व्यवहार प्रदर्शित नहीं किया जाता, जब तक कि उसे दर्शाने के लिए प्रबलन प्रदान नहीं किया जाए। टोलमैन (Tolman) ने अव्यक्त अधिगम को समझने के लिए उनके एक प्रयोग का संक्षिप्त वर्णन किया जा रहा है। टोलमैन ने चूहों के दो समूहों को भूल-भुलैया में छोड़ा तथा उन्हें अन्वेषण करने का अवसर दिया। चूहों के एक समूह को भूल-भुलैया के अंत में भोजन प्राप्त हुआ और उन्होंने भूल-भुलैया में प्रारंभ से अंत तक का रास्ता तेजी से खोज लिया। दूसरी ओर, चूहों के दूसरे समूहों को कोई पुरस्कार नहीं दिया गया तथा उन्होंने अधिगम के कोई स्पष्ट संकेत भी प्रदर्शित नहीं किए। किंतु बाद में जब उन्हें प्रबलित किया गया तो भी वे भूल-भुलैया के रास्ते में प्रारंभ से अंत तक उतनी ही सक्षमता से दौड़ने लगे जितना कि पुरस्कृत समूह के चूहे दौड़ते थे।
    टोलमैन ने यह प्रतिपादित किया कि अप्रबलित समूह के चूहों ने भी भूल-भुलैया के मानचित्र को अन्वेषण करके जल्दी ही सीख लिया था। केवल उन्होंने अपने अव्यक्त अधिगम का प्रदर्शन तब तक नहीं किया था जब तक कि ऐसा करने के लिए उन्हें प्रबलन प्रदान नहीं किया गया। इसके बजाय चूहों ने भूल-भुलैया का एक संज्ञानात्मक मानचित्र विकसित किया, अर्थात अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए उन्हें जिन दिशाओं और स्थानिक अवस्थितियों की आवशक्यता थी उनका मानस चित्रण किया।
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संज्ञानात्मक अधिगम
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अध्याय 6: अधिगम - समीक्षात्मक प्रश्न [पृष्ठ १३६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Psychology [Hindi] Class 11
अध्याय 6 अधिगम
समीक्षात्मक प्रश्न | Q 11. | पृष्ठ १३६
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