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प्रश्न
संसदीय समिति की व्यवस्था से संसद के विधायी कामों के मूल्यांकन और देखरेख पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर
- संसदीय समिति की प्रणाली ने संसद द्वारा कानून की निगरानी और मूल्यांकन को प्रभावित किया है क्योंकि कानून के तकनीकी बिंदुओं के बारे में अधिकांश निर्णय इन समितियों को संदर्भित किए जाते हैं। संसद समिति द्वारा दिए गए किसी भी सुझाव को शायद ही कभी खारिज करती है।
- विभिन्न विभागों से संबंधित बीस स्थायी समितियाँ हैं जो अपने-अपने विभागों से संबंधित बजट और उसके खर्च से संबंधित मुद्दों पर काम करती हैं। ये समितियां सदन में आने वाले अपने विभाग से संबंधित बिलों की निगरानी भी करती हैं। संयुक्त संसदीय समितियां वित्तीय अनियमितताओं की जांच करती हैं।
- इस प्रकार, संसदीय समितियों ने विधायिका पर बोझ कम किया है और समय की बचत की है क्योंकि संसद अपने सत्रों के दौरान सीमित समय के लिए ही मिलती है। हालांकि, ज्यादातर मौकों पर, संसद विधेयकों को मंजूरी देते समय उनके मसौदे में केवल मामूली बदलाव करती है। इसने संसद के विधानों के मूल्यांकन को काफी हद तक कमजोर कर दिया है।
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डॉली और सुधा में इस बात पर चर्चा चल रही है कि मौजूदा वक्त में संसद कितनी कारगर और प्रभावकारी है। डॉली का मानना था कि भारतीय संसद के कामकाज में गिरावट आयी है। यह गिरावट एकदम साफ दिखती है क्योंकि अब बहस-मुबाहिसे पर समय कम खर्च होता है और सदन की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न करने अथवा वॉकआउट (बहिर्गमन) करने में ज्यादा। सुधा का तर्क था कि लोकसभा में अलग-अलग सरकारों ने मुँह की खायी हैं, धराशायी हुई है। आप सुधा या डॉली के तर्क के पक्ष या विपक्ष में और कौन-सा तर्क देंगे?
किसी विधेयक को कानून बनने के क्रम में जिन अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है उन्हें क्रमवार सजाएँ।
(क) किसी विधेयक पर चर्चा के लिए प्रस्ताव पारित किया जाता है।
(ख) विधेयक भारत के राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है- बताएँ कि वह अगर इस पर हस्ताक्षर नहीं करता/करती है, तो क्या होता है?
(ग) विधेयक दूसरे सदन में भेजा जाता है और वहाँ इसे पारित कर दिया जाता है।
(घ) विधेयक का प्रस्ताव जिसे सदन में हुआ है उसमें यह विधेयक पारित होता है।
(ङ) विधेयक की हर धारा को पढ़ा जाता है और प्रत्येक धारा पर मतदान होता है।
(च) विधेयक उप-समिति के पास भेजा जाता है- समिति उसमें कुछ फेर-बदल करती है। और चर्चा के लिए सदन में भेज देती है।
(छ) सम्बद्ध मंत्री विधेयक की जरूरत के बारे में प्रस्ताव करता है।
(ज) विधि मन्त्रालय का कानून-विभाग विधेयक तैयार करता है।