हिंदी

सत्य क्या पुकारने से मिल सकता है? युधिष्ठिर विदुर को क्यों पुकार रहे हैं- महाभारत के प्रसंग से सत्य के अर्थ खोलें। - Hindi (Elective)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

सत्य क्या पुकारने से मिल सकता है? युधिष्ठिर विदुर को क्यों पुकार रहे हैं- महाभारत के प्रसंग से सत्य के अर्थ खोलें।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

सत्य यदि पुकारने से मिल जाता, तो आज असत्य का बोलबाला नहीं होता। सत्य पुकारने से नहीं अपितु सत्य का आचरण करने, दृढ़ निश्चय तथा उसका सामना करने से मिलता है। उसके लिए लोगों को कठिन संघर्ष से गुजरना पड़ता है। जैसे धर्मराज युधिष्ठिर ने किया था। उन्होंने संपूर्ण जीवन सत्य का आचरण किया तथा सत्य को अपना धर्म समझा। यही कारण था कि वह धर्मराज कहलाए। धर्मराज कहलाने से पूर्व युधिष्ठिर भी सत्य को जानने के लिए मारे-मारे फिर रहे थे। विदुर ने उन्हें यह मार्ग दिखलाया था। जब युधिष्ठिर को ज्ञात हुआ कि विदुर सत्य के मार्ग से परिचित है, तो वह उनके पीछे हो लिए। वे विदुर के मुख से सत्य के विषय में सुनना चाहते थे। परन्तु विदुर उन्हें यह बताने से भाग रहे थे। महाभारत में विदुर एकमात्र ऐसे पात्र थे, जो विद्वान तथा महाज्ञानी थे। वह नीति-अनीति से परिचित थे। परन्तु कौरवों के प्रति उनकी निष्ठा ने उनके मुँह में पट्टी बाँध दी थी। उनके अतिरिक्त सत्य का सही ज्ञान किसी और को नहीं था। विदुर जानते थे कि सत्य का मार्ग बड़ा ही कठिन है। वे स्वयं को बहुत संतुलित रखते हुए इस मार्ग में बढ़ रहे थे। युधिष्ठिर के दृढ़ निश्चय के आगे उन्हें घुटने टेकने पड़े और वह वहीं रुक गए। जैसे ही युधिष्ठिर की आँखें विदुर की आँखों से मिली सत्य का ज्ञान रूपी प्रकाश उनकी अंतरात्मा में उतर गया और उनकी आत्मा भी उसके प्रकाश से प्रकाशित हो गई। अर्थात युधिष्ठिर को भी सत्य की महिमा का ज्ञान हो गया।

shaalaa.com
सत्य
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 1.05: विष्णु खरे (एक कम, सत्य) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ३३]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
अध्याय 1.05 विष्णु खरे (एक कम, सत्य)
प्रश्न-अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ ३३

संबंधित प्रश्न

सत्य का दिखना और ओझल होना से कवि का क्या तात्पर्य है?


सत्य और संकल्प के अंतर्संबंध पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।


'युधिष्ठिर जैसा संकल्प' से क्या अभिप्राय है?


कविता में बार-बार प्रयुक्त 'हम' कौन है और उसकी चिंता क्या है?


सत्य की राह पर चल। अगर अपना भला चाहता है तो सच्चाई को पकड़।– इन पंक्तियों के प्रकाश में कविता का मर्म खोलिए।


आप सत्य को अपने अनुभव के आधार पर परिभाषित कीजिए।


'ईमानदारी और सत्य की राह आत्म सुख प्रदान करती है' इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।


गांधी जी की आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' की कक्षा में चर्चा कीजिए।


'लगे रहो मुन्नाभाई' फ़िल्म पर चर्चा कीजिए।


कविता में आए महाभारत के कथा-प्रसंगों को जानिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×