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उपमा अलंकार के दो उदाहरण छाँटिए। - Hindi (Elective)

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प्रश्न

उपमा अलंकार के दो उदाहरण छाँटिए।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

  1. "कबहुँ समुझि वनगमन राम को रही चकि चित्रलिखी सी।"– इस पंक्ति में 'चित्रलिखी सी' में उपमा अलंकार है। इसमें माता कौशल्या की दशा का वर्णन चित्र रूप में उकेरी गई स्त्री से किया गया है। जैसे- चित्र में बनी स्त्री हिलती-डुलती नहीं है, वैसे ही माता कौशल्या राम को अपने पास न पाकर चित्र के समान स्तब्ध और चकित खड़ी रह जाती है।

  2. 'तुलसीदास वह समय कहे तें लागति प्रीति सिखी सी।'– इस पंक्ति में 'सीखी सी' में उपमा अलंकार है। इसमें माता कौशल्या की दशा मोरनी के समान दिखाई गयी है। जो वर्षा के समय प्रसन्न होकर नाचती है परन्तु जब उसकी दुष्टि अपने पैरों पर जाती है, तो वह रो पड़ती है।

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अलंकार
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अध्याय 1.07: तुलसीदास (भरत-राम का प्रेम, पद) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ४५]

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एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
अध्याय 1.07 तुलसीदास (भरत-राम का प्रेम, पद)
प्रश्न-अभ्यास | Q 4. (क) | पृष्ठ ४५

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निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

लट लटकनि मनो मत्‍त मधुप गन मादक मधुहि पियें। 


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

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निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

सुख चपला-सा, दुख घन में
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निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

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बड़े-बड़े पियराए पत्ते


अलंकार बताइए:

खिली हुई हवा आई, फिरकी-सी आई, चली गई


उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग कहाँ और क्यों किया गया है? उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।


निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।

कहि कहि आवन छबीले मनभावन को, गहि गहि राखति ही दैं दैं सनमान को।


निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।

अब न घिरत घन आनंद निदान को।


अपने द्वारा इस सत्र में पढ़ी किन्हीं दो कविताओं में प्रयुक्त अलंकारों के महत्व का वर्णन कीजिए।


निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।

चरण-सरोज पखारन लागा।


निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।

जान पड़ता है नेत्र देख बड़े-बड़े।
हीरकों में गोल नीलम हैं जड़े।।


निम्नलिखित पंक्ती में उद्धृत अलंकार पहचान कर उसका नाम लिखिए:

हनुमंत की पूँछ में लग न पाई आग।
लंका सगरी जल गई, गए निशाचर भाग।।


"अर्थ बिना कब पूर्ण हैं, शब्द, सकल जग-काज।

अर्थ अगर आ जाए तो, ठाठ-बाट औ राज।।" 

इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है-


"इधर उठाया धनुष क्रोध में और चढ़ाया उस पर बाण।

धरा, सिंधु, नभ कॉँपे सहसा, विकल हुए जीवों के प्राण।।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


"कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।

हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।” 

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-


निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उपप्रकार लिखिए:

वाक्य प्रकार उपप्रकार
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो ______ ______

निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनका नाम लिखिए:

पत्रा ही तिथि पाइयै, वाँ घर के चहुँ पास। 
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निम्नलिखित पंक्ती में उद्धृत अलंकार पहचान कर उसका नाम लिखिए:

सिंधु - सेज पर धरा - वधू।
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निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।


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इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


“हनुमान की पूँछ में लगन पाई आग
लंका सिगरी जल गई गए निसावर भाग”

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इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है -


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इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -


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'कहीं साँस लेते हो घर- घर भर देते हो' पंक्ति में निहित अलंकार है -


'उस काल मारे क्रोध के, तन काँपने उसका लगा। मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा।' में अलंकार है -


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राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।'

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'माली आवत देख कर कलियाँ करैं पुकार' - प्रस्तुत पंक्ति में अलंकार है -


निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

सोहत ओढ़े पीत पट श्याम सलोने गात।
मनों नीलमनि शैल पर, आतप पर्‌यो प्रभात।।


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