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प्रश्न
विद्रोहियों के बीच एकता स्थापित करने के लिए क्या तरीके अपनाए गए? ।
दीर्घउत्तर
उत्तर
- विद्रोहियों के बीच एकता स्थापित करने के लिए निम्न तरीके अपनाए गए
- गाय और सूअर की चर्बी के कारतूस, आटे में सूअर और गाय की हड्डियों का चूरा, प्लासी की लड़ाई के 100 साल पूरे होते ही भारत से अंग्रेजों की वापसी जैसी खबरों ने हिंदू-मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को समान रूप से उत्तेजित करके उन्हें एकजुट किया। अनेक स्थानों पर विद्रोहियों ने स्त्रियों और पुरुषों दोनों का सहयोग लिया ताकि समाज में लिंग भेदभाव कम हो।
- हिंदू और मुसलमानों ने मिलकर मुग़ल सम्राट बहादुर शाह का आशीर्वाद प्राप्त किया ताकि विद्रोह को वैधता प्राप्त हो सके | और मुग़ल बादशाह के नाम से विद्रोह को चलाया जा सके।
- विद्रोहियों ने मिलकर अपने शत्रु फिरंगियों का सामना किया। उन्होंने दोनों समुदायों में लोकप्रिय तीन भाषाओं-हिंदी, उर्दू और फ़ारसी में अपीलें जारी कीं।
- बहादुरशाह के नाम से जारी की गई घोषणा में मुहम्मद और महावीर, दोनों की दुहाई देते हुए जनता से इस लड़ाई में शामिल होने का आह्वान किया गया। दिलचस्प बात यह है कि आंदोलन में हिंदू और मुसलमानों के बीच खाई पैदा करने की अंग्रेजों द्वारा की गई कोशिशों के बाबजूद ऐसा कोई फर्क नहीं दिखाई दिया। अंग्रेज़ शासन ने दिसंबर, 1857 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित बरेली के हिंदुओं को मुसलमानों के खिलाफ़ भड़काने के लिए 50,000 रुपये खर्च किए। लेकिन उनकी यह कोशिश नाकामयाब रही।
- 1857 के विद्रोह को एक ऐसे युद्ध के रूप में पेश किया जा रहा था जिसमें हिंदुओं और मुसलमानों, दोनों का नफा-नुकसान बराबर था। इश्तहारों में अंग्रेजों से पहले के हिंदू-मुस्लिम अतीत की ओर संकेत किया जाता था और मुग़ल साम्राज्य के तहत विभिन्न समुदायों के सह-अस्तित्व को गौरवगान किया जाता था।
- विद्रोहियों ने कई संचार माध्यमों का प्रयोग किया। सिपाही या उनके संदेशवाहक एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहे थे। विद्रोहियों ने कार्यवाही को समरूपता, एक जैसी योजना और समन्वय स्थापित किया ताकि लोगों में एकता पैदा हो।
- अनेक स्थानों पर सिपाही अपनी लाइनों में रात के समय पंचायतें करते थे, जहाँ सामूहिक रूप से कई फैसले लिए जाते थे। वे अपनी-अपनी जाति और जीवन-शैली के बारे में निर्णय लेते थे। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को और कानपुर के पेशवा नाना साहिब को मुस्लिम और हिंदू सिपाहियों ने साहस और वीरता का प्रतीक बनाया ताकि सभी लोग एक मंच पर आकर ब्रिटिश राज्य के खिलाफ लड़ सकें।
- मुस्लिम शहजादों अथवा नवाबों की ओर से अथवा उनके नाम पर जारी की गई घोषणाओं में हिंदुओं की भावनाओं का भी आदर किया जाता था एवं उनका समान रूप से ध्यान रखा जाता था।
- सूदखोरों, सौदागरों और साहूकारों को बिना धार्मिक भेदभाव किए सभी लोगों ने मिलकर इसलिए लूटा ताकि पिछड़े और गरीब लोग उनसे बदला ले सकें और विद्रोहियों की संख्या आम लोगों के विद्रोह में शामिल होने से बढ़ सके।
- जन सामान्य को यह विश्वास दिला दिया गया कि अंग्रेज़ संपूर्ण भारत का ईसाईकरण करना चाहते हैं। इस प्रकार जन सामान्य को यह प्रेरणा दी गई कि सब एक होकर धर्म और जाति के भेदभाव को भूलकर अपनी अस्मिता के लिए ब्रिटिश शासन के विरुद्ध छेड़े गए संघर्ष में भाग लें।
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विद्रोह की छवियाँ
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