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Academic Year: 2022-2023
Date: मार्च 2023
Duration: 3h
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सामान्य और आवश्यक निर्देश-
- इस प्रश्न पत्र में दो खंड हैं- खंड 'अ' और 'ब'। कुल प्रश्न 13 हैं।
- खंड 'अ' में 45 वस्तुपरक प्रश्न पूछे गए हैं, जिनमें से केवल 40 प्रश्नों के उत्तर देने हैं।
- खंड 'ब' में वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं। प्रश्नों के उचित आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
- प्रश्नों के उत्तर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए दीजिए।
- दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
- यथासंभव दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर क्रमशः लिखिए।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए।
उपवास और संयम ये आत्महत्या के साधन नहीं हैं। भोजन का असली स्वाद उसी को मिलता है जो कुछ दिन बिना खाए भी रह सकता है। ‘त्यक्तेन भुंजीथा:’, जीवन का भोग त्याग के साथ करो, यह केवल परमार्थ का ही उपदेश नहीं है, क्योंकि संयम से भोग करने पर जीवन में जो आनंद प्राप्त होता है, वह निरा भोगी बनकर भोगने से नहीं मिल पाता ज़िंदगी की दो सूरतें हैं। एक तो यह कि आदमी बड़े-से-बड़े मकसद के लिए कोशिश करे, जगमगाती हुई जीत पर पंजा डालने के लिए हाथ बढ़ाए, और अगर असफलताएँ कदम-कदम पर जोश की रोशनी के साथ अंधियाली का जाल बुन रही हों, तब भी वह पीछे को पाँव न हटाए। दूसरी सूरत यह है कि उन गरीब आत्माओं का हमजोली बन जाए जो न तो बहुत अधिक सुख पाती हैं और न जिन्हें बहुत अधिक दुख पाने का ही संयोग है, क्योंकि वे आत्माएँ ऐसी गोधूलि में बसती हैं जहाँ न तो जीत हँसती है और न कभी हार के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ती है। इस गोधूलि वाली दुनिया के लोग बंधे हुए घाट का पानी पीते हैं, वे ज़िंदगी के साथ जुआ नहीं खेल सकते। और कौन कहता है कि पूरी ज़िंदगी को दाँव पर लगा देने में कोई आनंद नहीं है? जनमत की उपेक्षा करके जीने वाला आदमी दुनिया की असली ताकत होता है और मनुष्यता को प्रकाश भी उसी आदमी से मिलता है। ज़िंदगी से, अंत में, हम उतना ही पाते हैं जितनी कि उसमे पूँजी लगाते हैं। यह पूँजी लगाना ज़िंदगी के संकटों का सामना करना है, उसके उस पन्ने को उलट कर पढ़ना है जिसके सभी अक्षर फूलों से ही नहीं, कुछ अंगारों से भी लिखे गए हैं। ज़िंदगी का भेद कुछ उसे ही मालूम है जो यह जानकार चलता है की ज़िंदगी कभी भी ख़त्म न होने वाली चीज़ है। अरे! ओ जीवन के साधकों! अगर किनारे की मरी सीपियों से ही तुम्हें संतोष हो जाए तो समुद्र के अंतराल में छिपे हुए मौक्तिक - कोष को कौन बाहर लाएगा? दुनिया में जितने भी मज़े बिखेरे गए हैं उनमें तुम्हारा भी हिस्सा है। वह चीज़ भी तुम्हारी हो सकती है जिसे तुम अपनी पहुँच के परे मान कर लौटे जा रहे हो। कामना का अंचल छोटा मत करो, ज़िंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो, रस की निर्झरी तुम्हारे बहाए भी बह सकती है। |
(i) ‘त्यक्तेन भुंजीथा:’ कथन से लेखक के व्यक्तित्व की किस विशेषता का बोध होता है? (1)
(क) परिवर्जन
(ख) परिवर्तन
(ग) परावर्तन
(घ) प्रत्यावर्तन
(ii) मंज़िल पर पहुँचने का सच्चा आनंद उसे मिलता है, जिसने उसे - (1)
(क) आन की आन में प्राप्त कर लिया हो
(ख) पाने के लिए भरसक प्रयास किया हो
(ग) हाथ बढ़ा कर मिट्ठी में कर लिया हो
(घ) सच्चाई से अपने सपनों में बसा लिया हो
(iii) ‘गोधूलि’ शब्द का तात्पर्य है - (1)
(क) गोधेनु
(ख) संध्यावेला
(ग) गगन धूलि
(घ) गोद ली कन्या
(iv) ‘गोधूलि’ वाली दुनिया के लोगों से अभिप्राय है - (1)
(क) विवशता और अभाव में जीने वाले
(ख) जीवन को दाँव पर लगाने वाले
(ग) गायों के खुरों से धूलि उड़ाने वाले
(घ) क्षितिज में लालिमा फैलाने वाले
(v) जीवन में असफलताएँ मिलने पर भी साहसी मनुष्य क्या करता है? (1)
(क) बिना डरे आगे बढ़ता है क्योंकि डर के आगे जीत है
(ख) पराजय से निपटने के लिए फूँक-फूँककर कदम आगे रखता है
(ग) अपने मित्र बंधुओं से सलाह और मदद के विषय में विचार करता है
(घ) असफलता का कारण ढूँढकर पुनः आगे बढ़ने का प्रयास करता है
(vi) आप कैसे पहचानेंगे कि कोई व्यक्ति साहस की ज़िंदगी जी रहा है? (1)
(क) जनमत की परवाह करने वाला
(ख) निडर और निशंक जीने वाला
(ग) शत्रु के छक्के छुड़ाने वाला
(घ) भागीरथी प्रयत्न करने वाला
(vii) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)
(I) प्रत्येक परिस्थिति का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।
(II) मनुष्य अपने दृढ़ मंतव्य व कठिन परिश्रम से सर्वोच्च प्राप्ति की ओर अग्रसर रहता है।
(III) विपत्ति सदैव समर्थ के समक्ष ही आती है, जिससे वह पार उतर सके।
उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
(क) केवल I
(ख) केवल III
(ग) I और II
(घ) II और III
(viii) ‘ज़िंदगी को दाँव पर लगा देने’ में कोई आनंद नहीं है? लेखक इससे सिद्ध करना चाहते हैं कि ज़िंदगी - (1)
(क) रंगमंच के कलाकारों के समान व्यतीत करनी चाहिए।
(ख) में सकारात्मक परिस्थितियाँ ही आनंद प्रदान करती हैं।
(ग) में प्रतिकूलता का अनुभव जीवनोपयोगी होता है।
(घ) केवल दुखद स्थितियों का सामना करवाती है।
(ix) किन व्यक्तियों को सुख का स्वाद अधिक मिलता है? (1)
(क) जो अत्यधिक सुख प्राप्त करते हैं
(ख) जो सुख-दुख से दूर होते हैं
(ग) जो पहले दुख झेलते हैं
(घ) जो सुख को अन्य लोगों से साझा करते हैं
(x) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1)
कथन (A): ‘ज़िंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो, रस की निर्झरी तुम्हारे बहाए भी बह सकती है’।
कारण (R): ज़िंदगी रूपी फल का रसास्वादन करने के लिए दोनों हाथों से श्रम करना होगा।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(घ) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
Chapter: [0.06] अपठित विभाग
निम्नलिखित पद्यांश से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प-चयन द्वारा दीजिए।
चिड़िया को लाख समझाओ यूँ तो बाहर समुद्र है, नदी है, झरना है, |
(i) पिंजड़े के भीतर चिड़िया को क्या-क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं? (1)
(क) खाने की स्वतंत्रता, सम्मान और स्नेह
(ख) नीर, कनक, आवास और सुरक्षा
(ग) प्यार, पुरस्कार, भोजन और हवा
(घ) निश्चितता, निर्भयता, नियम और नीरसता
(ii) बाहर सुखों का अभाव और प्राणों का संकट होने पर भी चिड़िया मुक्ति ही क्यों चाहती है? (1)
(क) वह अपने परिवार से मिलना चाहती है।
(ख) वह आज़ाद जीवन जीना पसंद करती है।
(ग) वह जीवन से मुक्ति चाहती है।
(घ) वह लंबी उड़ान भरना चाहती है।
(iii) चिड़िया के समक्ष धरती को निर्मम बताने का मंतव्य है - (1)
(क) भयावह स्थिति उत्पन्न करना
(ख) छोटे जीव के प्रति दया भाव
(ग) बहेलिये से बचाव की प्रेरणा
(घ) जीवनोपयोगी वस्तुएँ जुटाने का संघर्ष दर्शाना
(iv) पद्यांश का मूल प्रतिपाद्य क्या है? (1)
(क) पिंजरे में रखने वालों को सही राह दिखाना
(ख) पिंजरे के भीतर और बाहर की दुनिया दिखाना
(ग) पिंजरे के पक्षी की उड़ान और दर्द से परिचित कराना
(घ) पिंजरे के पक्षी के माध्यम से स्वतंत्रता का महत्त्व बताना
(v) कवि के संबंध में इनमें से सही है कि वह - (1)
(क) प्रकृति के प्रति सचेत हैं
(ख) चिड़िया की सुरक्षा चाहते हैं
(ग) आज़ादी के समर्थक हैं
(घ) अन्न-जल की उपयोगिता बताते हैं
Chapter: [0.06] अपठित विभाग
निम्नलिखित पद्यांश से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प-चयन द्वारा दीजिए।
हैं जन्म लेते जगह में एक ही, मेह उन पर है बरसता एक-सा, छेदकर काँटा किसी की उंगलियाँ, फूल लेकर तितलियों को गोद में है खटकता एक सबकी आँख में |
(i) प्रस्तुत काव्यांश किससे संबंधित है? (1)
(क) फूल और तितलियों से
(ख) फल और पौधे से
(ग) पौधे और चाँदनी से
(घ) बड़प्पन की पहचान से
(ii) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)
(I) सद्गुणों के कारण ही मानुस प्रेम का पात्र बनता है।
(II) परिवेशगत समानता सदैव अव्यवस्था को जन्म देती है।
(III) भौगोलिक परिस्थितियाँ प्राकृतिक भिन्नता का कारण हैं।
उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
(क) केवल I
(ख) केवल III
(ग) I और II
(घ) II और III
(iii) इस काव्यांश से हमें क्या सीख मिलती है? (1)
(क) मनुष्य के कर्म उसे प्रसिद्धि दिलाते हैं।
(ख) समान परिवेश में रहते हुए मनुष्य समान आदर पाते हैं।
(ग) किसी भी कुल में जन्म लेने से ही मनुष्य बड़ा हो सकता है।
(घ) समान पालन-पोषण होने पर अलग व्यक्तियों के स्वभाव समान होते हैं।
(iv) ‘फाड़ देता है किसी का वर वसन’ में ‘वसन’ शब्द का अर्थ है - (1)
(क) व्यसन
(ख) वस्त्र
(ग) वास
(घ) वासना
(v) कवितानुसार फूल निम्न में से कौन-सा कार्य नहीं करता? (1)
(क) भँवरों को अपना रस पिलाता है।
(ख) तितलियों को अपनी गोद में खिलाता है।
(ग) फल बनकर पशु-पक्षियों और मनुष्यों का पेट भरता है।
(घ) सुरों के शीश पर सोहता है।
Chapter: [0.06] अपठित विभाग
मुद्रित माध्यमों के लेखन में सहज प्रवाह के लिए ज़रूरी है -
तारतम्यता
उपलब्धता
एकरेखीयता
साध्यता
Chapter: [0.031] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
संबंधित घटना के दृश्य बाइट व ग्राफिक द्वारा खबर को संपूर्णता से पेश करना कहलाता है -
एंकर विजुअल
एंकर बाइट
एंकर पैकेज
ड्राई एंकर
Chapter: [0.031] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
छह ककार के लिए उचित क्रम का चयन कीजिए -
क्या, कौन, कहाँ, कब, क्यों, कैसे
किसने, कब, क्यों, कैसे, कहाँ, किधर
कैसे, किससे, कब, क्यों, कितना, कौन
क्यों, कैसे, कब, कहाँ, किससे, किसने
Chapter: [0.032] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
कॉलम ‘क’ का कॉलम ‘ख’ से उचित मिलान कीजिए।
कॉलम ‘क’ | कॉलम ‘ख’ |
(1) बीट रिपोर्टर | (i) निवेशक |
(2) फीचर | (ii) संवाददाता |
(3) कारोबार | (iii) घुटने टेकना |
(4) खेल | (iv) कथात्मक |
(1) - (iii), (2) - (iv), (3) - (i), (4) - (ii)
(1) - (ii), (2) - (iv), (3) - (i), (4) - (iii)
(1) - (iv), (2) - (iii), (3) - (ii), (4) - (i)
(1) - (ii), (2) - (i), (3) - (iv), (4) - (iii)
Chapter: [0.031] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
विशेष लेखन के लिए सबसे जरूरी बात है -
चील-उड़ान और शब्द-विवेक
गिद्ध-दृष्टि और पक्का इरादा
शब्दावली और उपलब्धियाँ
प्रभावशीलता और बुद्धिमत्ता
Chapter: [0.033] विशेष लेखन-स्वरुप और प्रकार
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए।
प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे भोर का नभ राख से लीपा हुआ चौका बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से स्लेट पर या लाल खड़िया चाक नील जल में या किसी की और... जादू टूटता है इस उषा का अब |
(i) नील जल में किसी की गौर, झिलमिल देह जैसे हिल रही हो में कौन-सा भाव है? (1)
(क) तरलता का
(ख) निर्मलता का
(ग) उज्ज्वलता का
(घ) सहजता का
(ii) नीले नभ में उदय होता हुआ सूर्य किसके जैसा प्रतीत हो रहा है? (1)
(क) शंख जैसा
(ख) गौरवर्णीय सुंदरी जैसा
(ग) सिंदूर जैसा
(घ) नीले जल जैसा
(iii) इस काव्यांश में कवि ने उषा का कौन-सा चित्र उपस्थित किया है? (1)
(क) छायाचित्र
(ख) रेखाचित्र
(ग) शब्दचित्र
(घ) भित्तिचित्र
(iv) अलंकार की दृष्टि से कौन-सा विकल्प सही है? (1)
(क) | बहुत नीला शंख जैसे | उपमा अलंकार |
(ख) | जादू टूटता है इस उषा का अब | उत्प्रेक्षा अलंकार |
(ग) | सूर्योदय हो रहा है | रूपक अलंकार |
(घ) | गौर झिलमिल देह जैसे हिल रही हो | अन्योक्ति अलंकार |
(v) कवि द्वारा भोर को राख का लीपा हुआ चौंका कहना प्रतिपादित करता है कि भोर का नभ - (1)
(क) अपनी आभा से चमत्कृत कर रहा है।
(ख) रात के समान गर्म हवा फैला रहा है।
(ग) सफ़ेद व नीले वर्णों का अद्भुत मिश्रण है।
(घ) नए परिवर्तन व आयामों का प्रतीक है।
Chapter: [0.0106] शमशेर बहादुर सिंह : उषा
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प को चुनिए।
कालिदास सौंदर्य के बाह्य आवरण को भेदकर उसके भीतर तक पहुँच सकते थे, दुख हो कि सुख, वे अपना भाव-रस उस अनासक्त कृपीवल की भाँति खींच लेते थे जो निर्दलित ईक्षुदंड से रस निकाल लेता है। कालिदास महान थे, क्योंकि वे अनासक्त रह सके थे। कुछ इसी श्रेणी की अनासक्ति आधुनिक हिंदी कवि सुमित्रानंदन पंत में है। कविवर रवींद्रनाथ में यह अनासक्ति थी। एक जगह उन्होंने लिखा- ‘राजोद्यान का सिंहद्वार कितना ही अभ्रभेदी क्यों न हो, उसकी शिल्पकला कितनी ही सुंदर क्यों न हो, वह यह नहीं कहता कि हममें आकर ही सारा रास्ता समाप्त हो गया। असल गंतव्य स्थान उसे अतिक्रम करने के बाद ही है, यही बताना उसका कर्तव्य है।’ फूल हो या पेड़, वह अपने-आप में समाप्त नहीं है। वह किसी अन्य वस्तु को दिखाने के लिए उठी हुई अँगुली है। वह इशारा है। |
(i) कालिदास की सौंदर्य-दृष्टि कैसी थी? (1)
(क) स्थूल और बाहरी
(ख) सूक्ष्म और संपूर्ण
(ग) आसक्ति और आडंबरों
(घ) अतिक्रम और अभ्रभेदी
(ii) कौन-से गुण के कारण कालिदास, सुमित्रानंदन पंत और रवींद्रनाथ टैगोर कविताओं के साथ न्याय कर पाए? (1)
(क) गंतव्यता
(ख) निर्दलीयता
(ग) कृषिवलता
(घ) तटस्थता
(iii) फूलों और पेड़ों से हमें जीवन की ______ की प्रेरणा मिलती है। (1)
(क) निरंतरता
(ख) भावपूर्णता
(ग) समापनता
(घ) अतिक्रमणता
(iv) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1)
कथन (A): पुष्प या पेड़ अपने सौंदर्य से यह बताते हैं कि यह सौंदर्य अंतिम नहीं है।
कारण (R): भारतीय शिल्पकला विशेष रूप से प्रसिद्ध है। विभिन्न कवियों ने इस बात की पुष्टि की है।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(घ) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(v) गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। (1)
(I) कला की कोई सीमा नहीं होती।
(II) शिरीष के वृक्ष को कालजयी अवधूत के समान कहा गया है।
(III) कालिदास की समानता आधुनिक काल के कवियों के साथ दिखाई गई है।
उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
(क) केवल I
(ख) केवल II
(ग) I और II
(घ) I और III
Chapter: [0.011699999999999999] हजारी प्रसाद द्विदेदी : शिरीष के फूल
‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी की मूल संवेदना आप किसे मानेंगे-
पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव
हाशिए पर धकेले जाते मानवीय मूल्य
पीढ़ी अंतराल
सिल्वर वैडिंग के परिणाम
Chapter: [0.021] सिल्वर वैडिंग
‘सिल्वर वैडिंग’ पाठ में ‘जो हुआ होगा’ वाक्य का अर्थ है-
पाश्चात्य विचारधारा के संदर्भ में
परिवार की संरचना के संदर्भ में
किशन दा की मृत्यु के संदर्भ में
यशोधर बाबू की नियुक्ति के संदर्भ में
Chapter: [0.021] सिल्वर वैडिंग
दादा कोल्हू जल्दी क्यों लगाना चाहते थे?
काम जल्दी समाप्त करने के लिए
दूसरी फसल के लिए
गुड़ की ज्यादा कीमत के लिए
खेत में पानी देने के लिए
Chapter: [0.022000000000000002] जूझ
‘जूझ’ उपन्यास मूलतः किस भाषा में लिखा गया है?
हिंदी
अंग्रेज़ी
मराठी
गुजराती
Chapter: [0.022000000000000002] जूझ
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लेखक आनंद यादव की माँ के अनुसार पढ़ाई की बात करने पर लेखक का पिता कैसे गुर्राता है?
कुत्ते के समान
शेर के समान
जंगली सूअर के समान
चीते के समान
Chapter: [0.022000000000000002] जूझ
सिंधु घाटी की सभ्यता के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है?
सिंधु घाटी की सभ्यता प्राचीनतम सभ्यता थी।
सिंधु घाटी की सभ्यता आडंबरहीन सभ्यता थी।
सिंधु घाटी की सभ्यता छोटी होते हुए भी महान थी।
सिंधु घाटी की सभ्यता में राजतंत्र स्थापित नहीं था।
Chapter: [0.023] अतीत में दबे पाँव
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
(I) महाकुंड स्तूप में उत्तर और दक्षिण से सीढ़ियाँ उतरती हैं।
(II) मोहनजोदड़ो सभ्यता में सूत की कताई, बुनाई और रंगाई भी होती थी।
(III) सिंधु घाटी सभ्यता में जल निकासी की व्यवस्था अत्यंत बुरी थी।
(IV) मोहनजोदड़ो से मिला नरेश के सिर का मुकुट बहुत छोटा था।
उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
केवल I
केवल III
I, II और III
I, II और IV
Chapter: [0.023] अतीत में दबे पाँव
राखालदास बनर्जी कौन थे?
शिक्षक
भिक्षुक
पुरातत्त्ववेत्ता
व्यापारी
Chapter: [0.023] अतीत में दबे पाँव
‘जूझ’ कहानी लेखक की किस प्रवृत्ति को उद्घाटित करती है?
कविता करने की प्रवृत्ति
पढ़ने की प्रवृत्ति
लेखन की प्रवृत्ति
संघर्षमयी प्रवृत्ति
Chapter: [0.022000000000000002] जूझ
किशोर दा के रिटायर होने पर यशोधर बाबू उनकी सहायता क्यों नहीं कर पाए थे?
यशोधर बाबू की पत्नी किशन दा से नाराज़ थी।
यशोधर बाबू का अपना परिवार था, जिसे वे नाराज़ नहीं करना चाहते थे।
यशोधर बाबू के घर में किशन दा के लिए स्थान का अभाव था।
किशन दा को यशोधर बाबू ने अपने घर में स्थान देना चाहा था, जिसे किशन दा ने स्वीकार नहीं किया।
Chapter: [0.021] सिल्वर वैडिंग
नीचे दिए गए अप्रत्याशित विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका
Chapter: [0.05] लेखन कौशल्य
नीचे दिए गए अप्रत्याशित विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
दिया और तूफ़ान : मानव जीवन का सत्य
Chapter: [0.05] लेखन कौशल्य
नीचे दिए गए अप्रत्याशित विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
झरोखे से बाहर
Chapter: [0.05] लेखन कौशल्य
नीचे दिए गए अप्रत्याशित विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
आज़ादी का अमृत महोत्सव: स्वर्णिम 75 साल
Chapter: [0.05] लेखन कौशल्य
‘कहानीकार द्वारा कहानी के प्रसंगों या पात्रों के मानसिक द्वंद्वों के विवरण के दृश्यों की नाटकीय प्रस्तुति में काफ़ी समस्या आती है।’ इस कथन के संदर्भ में नाट्य रूपांतरण की किन्हीं तीन चुनौतियों का उल्लेख कीजिए।
Chapter: [0.034] कैसे करें कहानी का नाट्य रूपांतर
रेडियो श्रव्य माध्यम है। यह ध्वनि के माध्यम से ही संप्रेषण करता है। इसलिए नाटक में ध्वनि संकेतों का विशिष्ट महत्व है। रेडियो नाटक में ध्वनि संकेतों की महत्ता स्पष्ट करते हुए कोई तीन बिंदु अवश्य लिखिए।
Chapter: [0.035] कैसे बनता है रेडियो नाटक
रटंत या कुटेव को बुरी लत क्यों कहा गया है? नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन द्वारा इस लत से कैसे बचा जा सकता है?
Chapter: [0.036000000000000004] नए अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
समाचार लेखन की एक विशेष शैली होती है। इस शैली का नाम बताते हुए समाचार लेखन की इस शैली को स्पष्ट कीजिए।
Chapter: [0.032] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
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बीट रिपोर्टिंग और विशेषीकृत रिपोर्टिंग में क्या अंतर है? स्पष्ट कीजिए।
Chapter: [0.033] विशेष लेखन-स्वरुप और प्रकार
फीचर क्या है? फीचर को परिभाषित करते हुए अच्छे फीचर की किन्हीं तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Chapter: [0.032] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
‘आत्मपरिचय’ कविता में कवि ने अपने जीवन में किन परस्पर विरोधी बातों का सामंजस्य बिठाने की बात की है?
Chapter: [0.0101] हरिवंश राय बच्चन : आत्मपरिचय, एक गीत
‘रस का अक्षयपात्र’ से कवि ने रचनाकर्म की किन विशेषताओं की और इंगित किया है?
Chapter: [0.011000000000000001] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Chapter: [0.010700000000000001] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
‘पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं’- बच्चों का उड़ान से कैसा संबंध बनता है?
Chapter: [0.0102] आलोक धन्वा : पतंग
बात और भाषा परस्पर जुड़े होते हैं, किंतु कभी-कभी भाषा के चक्कर में ‘सीधी बात भी टेढ़ी हो जाती है’ कैसे?
Chapter: [0.0103] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
कवितावली में उद्धृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है।
Chapter: [0.0108] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
कवितावली में उद्धृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है।
Chapter: [0.0108] गोस्वामी तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [0.011200000000000002] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
कहानी के किस-किस मोड़ पर लुट्टन के जीवन में क्या-क्या परिवर्तन आए?
Chapter: [0.011399999999999999] फणीश्वर नाथ रेणु : पहलवान की ढोलक
जाति-प्रथा भारतीय समाज में बेरोजगारी व भुखमरी का भी एक कारण कैसे बनती जा रही है? क्या यह स्थिति आज भी है?
Chapter: [0.0118] बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर : श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज
लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत (संन्यासी) की तरह क्यों माना है?
Chapter: [0.011699999999999999] हजारी प्रसाद द्विदेदी : शिरीष के फूल
Chapter: [0.0113] धर्मवीर भारती : काले मेघा पानी दे
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए :-
भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा, क्योंकि उसमें दुर्गुणों का अभाव नहीं। लेखिका ने ऐसा क्यों कहा होगा?
Chapter: [0.0111] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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