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प्रश्न
‘आत्मपरिचय’ कविता में कवि ने अपने जीवन में किन परस्पर विरोधी बातों का सामंजस्य बिठाने की बात की है?
उत्तर
इस कविता में, कवि ने अपने जीवन की अनेक विरोधी बातों का सामंजस्य बिठाने की बात की है। कवि सांसारिक कठिनाइयों से जूझ रहा है, फिर भी वह इस जीवन से प्यार करता है। वह संसार की परवाह नहीं करता क्योंकि संसार अपने चहेतों का गुणगान करता है। उसे यह संसार अपूर्ण लगता है। वह अपने सपनों का संसार लिए फिरता है। वह यौवन का उन्माद व अवसाद साथ लिए रहता है। वह शीतल वाणी में आग लिए फिरता है।
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आत्मकथ्य
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निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए -
मैं निज उर के उद्गार लिए फिरता हूँ, मैं जला हृदय में अग्नि, दहा करता हूँ, |
- कवि के स्वप्नों का संसार है? 1
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- आदर्श
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- निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए पद्यांश के अनुसार सही कथन को चयनित कर लिखिए। 1
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- हृदय
- इच्छा
- स्मृति
- आवेश
- निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए। 1
कथन (A): यथार्थ को स्वीकार नहीं करने से कवि के स्वप्न अधूरे रह गए हैं।
कारण (R): कल्पना और वास्तविकता में सामंजस्य की कमी होने से कवि को संसार अधूरा महसूस होता है।- कथन (A) सही है, कारण (R) गलत है।
- कथन (A) सही नहीं है, कारण (R) सही है।
- कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं, किंतु कारण (R) उसकी सही व्याख्या नहीं करता।
- कथन (A) सही है तथा कारण (R) दोनों सही हैं, कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
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