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संसार में कष्टों को सहते हुए भी खुशी और मस्ती का माहौल कैसे पैदा किया जा सकता है? - Hindi (Core)

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प्रश्न

संसार में कष्टों को सहते हुए भी खुशी और मस्ती का माहौल कैसे पैदा किया जा सकता है?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

यह सत्य सभी जानते हैं कि संसार में सुख-दुख समान रूप से आते-जाते रहते हैं। सुख के बाद दुख और दुख के बाद सुख का आना तय है। अतः हमें दुख का इतना मातम नहीं मानना चाहिए और सुख पर इतना अधिक प्रसन्न नहीं होना चाहिए। दोनों स्थितियों में समान भाव से रहना चाहिए। अतः जो मनुष्य इस सत्य को जान गया है, उसके लिए कष्ट इतने कष्टदायी नहीं रह जाते हैं। वह जानता है कि दुख की बदली अवश्य हटेगी और सुख रूपी प्रकाश अवश्य होगा। इस स्थिति में वह प्रसन्न रह पाएगा। जो व्यक्ति दुख से उभरेगा ही नहीं और कष्ट और कष्टदायी हो जाएँगे। यदि हम कष्ट को भूलकर प्रसन्न रहते हैं तथा विश्वास करते हैं कि सुख भी अवश्य आएँगे, तो हम खुशी और मस्ती का माहौल पैदा कर सकते हैं।
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आत्मपरिचय
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अध्याय 1: हरिवंश राय बच्चन (आत्मपरिचय, एक गीत) - अभ्यास [पृष्ठ ८]

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एनसीईआरटी Hindi - Aaroh Class 12
अध्याय 1 हरिवंश राय बच्चन (आत्मपरिचय, एक गीत)
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ ८

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निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए -

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सुख-दुख दोनों में मग्न रहा करता हूँ,
जग भव-सागर तरने की नाव बनाए,
मैं भव-मौजों पर मस्त बहा करता हूँ।

  1. कवि के स्वप्नों का संसार है?   1
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    3.  यथार्थ संसार से कवि को कोई सरोकार नहीं है।
    4. सुख-दुख का असर कवि पर होता है।
  3. काव्यांश में 'उर' से तात्पर्य है?  1
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    3. कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं, किंतु कारण (R) उसकी सही व्याख्या नहीं करता।
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