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प्रश्न
संसार में कष्टों को सहते हुए भी खुशी और मस्ती का माहौल कैसे पैदा किया जा सकता है?
उत्तर
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जहाँ पर दाना रहते हैं, वहीं नादान भी होते हैं- कवि ने ऐसा क्यों कहा होगा?
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जयशंकर प्रसाद की आत्मकथ्य कविता की कुछ पंक्तियाँ दी जा रही है। क्या पाठ में दी गई आत्मपरिचय कविता से इस कविता का आपको कोई संबंध दिखाई देता है? चर्चा करें।
आत्मकथ्य
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‘आत्मपरिचय’ कविता में कवि ने अपने जीवन में किन परस्पर विरोधी बातों का सामंजस्य बिठाने की बात की है?
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए -
मैं निज उर के उद्गार लिए फिरता हूँ, मैं जला हृदय में अग्नि, दहा करता हूँ, |
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- काव्यांश में 'उर' से तात्पर्य है? 1
- हृदय
- इच्छा
- स्मृति
- आवेश
- निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए। 1
कथन (A): यथार्थ को स्वीकार नहीं करने से कवि के स्वप्न अधूरे रह गए हैं।
कारण (R): कल्पना और वास्तविकता में सामंजस्य की कमी होने से कवि को संसार अधूरा महसूस होता है।- कथन (A) सही है, कारण (R) गलत है।
- कथन (A) सही नहीं है, कारण (R) सही है।
- कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं, किंतु कारण (R) उसकी सही व्याख्या नहीं करता।
- कथन (A) सही है तथा कारण (R) दोनों सही हैं, कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
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