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1975 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करते हुए सरकार ने इसके क्या कारण बताए थे? - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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प्रश्न

1975 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करते हुए सरकार ने इसके क्या कारण बताए थे?

दीर्घउत्तर

उत्तर

  • 25 जून, 1975 में सरकार द्वारा 'आंतरिक गड़बड़ी' के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करने के उसके पास कई कारण थे। इनमे से कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं -
  1. जनवरी 1974 में गुजरात में छात्र आंदोलन हुआ जिसका सारे देश में प्रभाव हुआ और राष्ट्रीय राजनीती भी प्रभावित हुई। जीवन की आवश्यकता वस्तुएँ जैसे की अनाज, खाद्य तेल आदि की कीमतें बहुत बढ़ी हुई थीं, जिनके कारण आम आदमी को बड़े संकट का सामना करना पड़ रहा था। बढ़ी हुई कीमत तथा प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार के विरुद्ध गुजरात में छात्रों ने राज्य व्यापी आंदोलन छेड़ दिया और इनकी अगुवाई सभी विपक्षी दल कर रहे थे। जब आंदोलन ने विकराल रूप धारण किया तो केंद्रीय सरकार ने वहां राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया केंद्रीय सरकार वहां शीघ्र ही चुनाव नहीं करवाना चाहती थी परंतु विपक्षी दल की मांग तथा विशेष रूप से कांग्रेस संगठन के नेता मोरारजी देसाई की इस घोषणा के बाद कि यदि राज्य में नए चुनाव नहीं करवाए गए तो वह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे मोरारजी देसाई अपने सिद्धांतों और वचनों का निष्ठा से पालन करने वाले नेता के रूप में छवि बनाए हुए थे केंद्र को विवश होकर जून 1975 को वहां विधानसभा के चुनाव करवाने पड़े जिसमें कांग्रेस को मुँह खानी पड़ी केंद्र की सरकार की छवि धूमिल हुई।
  2. बिहार में चलें छात्र आंदोलन ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप लिया आंदोलन मार्च 1974 में छात्रों द्वारा बढ़ती कीमतों खद्यान्नों की उपलब्धि के अभाव बढ़ती बेरोजगारी शासन में फैले भ्रष्टाचार आम आदमी के दुखों की और राज्य सरकार की अनदेखी आदि के आधार पर चलाया गया छात्रों ने समाजवादी पार्टी के संस्थापक महासचिव जयप्रकाश नारायण से प्रार्थना की की उनका नेतृत्व करें। इस समय जयप्रकाश नारायण ने सक्रिय राजनीति को छोड़ा हुआ था और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय थे उन्होंने छात्रों का निमंत्रण स्वीकार करते हुए दो शर्तें रखीं एक तो यह की आंदोलन अहिंसात्मक होगा। और दूसरा यह बिहार राज्य तक सीमित ना राष्ट्रव्यापी होगा। बिहार के छात्र आंदोलन ने राजनीतिक आंदोलन का रूप ले लिया बिहार सरकार की बर्खास्तगी की मांग की गई जयप्रकाश नारायण ने सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक सभी पक्षों में परिवर्तन करने के लिए "संपूर्ण क्रांति" की अपील की है बिहार सरकार के विरुद्ध प्रतिदिन आंदोलन बंद होने लगे और धीरे-धीरे यह सारे भारत में फैल गया यह कहा गया कि मौजूदा लोकतांत्रिक नहीं है क्रांति के द्वारा वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना की मांग की गई।
  3. मई 1975 की रेल हड़ताल ने सारे राष्ट्रीय में सरकार के विरुद्ध और असंतोष को बढ़ावा दिया। स्थानीय बसों की हड़ताल से ही नजरों का जनजीवन ठप्प हो जाता है रेल हड़ताल से सारे राष्ट्रीय का जनजीवन ठप्प हो गया यह हड़ताल जॉर्ज फर्नांडिस की अगुवाई में रेलवे कर्मचारियों ने बोनस तथा सेवा से जुड़ी अन्य मांगों के आधार पर की थी रेलवे भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का विधाम है और सारे राष्ट्रीय को प्रभावित करता है गरीबी के लिए आने-जाने का सस्ता तथा सुगम साधन भी है सरकार ने हड़ताल को असंवैधानिक घोषित किया और मांगे स्वीकार नहीं की गई 20 दिनों के बाद यह हड़ताल बिना किसी समझौते के वापस ले ली गई परंतु रेलवे कर्मचारियों आम आदमी तथा व्यापारियों के सरकार के विरुद्ध असंतोष को विकसित किया।
  4. सरकार और न्यायपालिका के बीच संघर्ष संविधान के लागू होने के बाद से ही न्यायपालिका तथा सरकार या संसद के बीच संघर्ष आरंभ हो गया था जबकि न्यायपालिका ने कई भूमि सुधार कानून को मौलिक अधिकारों के विरुद्ध घोषित किया था। सरकार ने इससे बचने के लिए 9वीं सूची की व्यवस्था की थी इंदिरा गांधी के कार्यकाल में प्रतिस्पर्धा तीखी हो गई पहले से ही यह प्रश्न आ रहा था कि संसद सर्वोच्च है और इसे संविधान के हर भाग में मौलिक अधिकारों में भी संशोधन का अधिकार है परंतु सर्वोच्च न्यायालय का कहना था कि इस संसद मौलिक अधिकारों में कटौती तथा संशोधन नहीं कर सकते हैं संसद तथा सरकार का कहना था कि संसद जनता का प्रतिनिधित्व करती है इसीलिए इसे सर्वोच्च अधिकार प्राप्त है 1967 में प्रसिद्ध केशव नंद भारती मामले ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय किया था की संसद संविधान के हर भाग में संशोधन कर सकती है परंतु संविधान के आधारभूत ढांचे को विकृत नहीं कर सकते निर्णय आज भी लागू है।
    इंदिरा गांधी ने प्रयास किया कि न्यायालय सरकार की समाजवादी नीतियों के पक्ष में निर्णय दे सरकार के दबाव में काम करें 1973 में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद खाली हुआ इंदिरा गांधी ने सर्वोच्च न्यायालय के प्रथम न्यायाधीश पद पर नियुक्त किए जाने की प्रथा का पालन न करते हुए तीन वरिष्ठतम जजों को छोड़कर ए. एन. रे. को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया। इस निर्णय की सारे देश में, कानूनी या न्यायिक क्षेत्रों में, विपक्षी दलों के द्वारा व्यापक निंदा हुई और इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर चोट माना गया। इन तीनों जजों ने सरकार के विरुद्ध निर्णय दिए थे। स्पष्ट दिखाई दिया की इंदिरा गाँधी सोवियत प्रणाली की तरह प्रतिबद्ध न्यायपालिका चाहती थी। प्रतिबद्ध नौकरशाही की आवश्यकता पर पहले ही सरकार अथवा कांग्रेस प्रचार कर रही थी की सरकारी कर्मचारियों का दायित्व सरकार के प्रति वचनबद्धता होनी चाहिए और सरकार की इच्छानुसार ही काम करना चाहिए। तीनों जजों ने त्यागपत्र दे दीए।
  5. संपूर्ण क्रांति के लिए संसद - मार्च का आह्वान - जय प्रकाश नारायण का संपूर्ण क्रांति का नारा सारे भारत में फैला, वह बिहार तक सिमित नहीं रहा। 1975 में जय प्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति को व्यावहारिक बनाने के लिए संसद - मार्च का आह्वान किया और इस संसद मार्च का नेतृत्व किया। इसका देशव्यापी प्रभाव पड़ा और सभी राज्यों से सभी विपक्षी दलों के अधिक लोग संसद - मार्च में सम्मिलित हुए। अय तक इतनी बड़ी रैली राजधानी में कभी नहीं हुई थी। इसने सरकार को विचलित किया और इंदिरा गाँधी की लोकप्रियता धरातल की ओर जाने लगी।
  6. इंदिरा गाँधी के विरुद्ध चुनाव याचिका का निर्माण - समाजवादी नेता राजनारायण ने 1971 का चुनाव इंदिरा गाँधी के मुकाबले में लड़ा था। हारने के बाद उसने इंदिरा गाँधी के विरुद्ध चुनाव याचिका दायर की थी और उसका आधार यह बताया था की उन्होंने चुनाव प्रचार में सरकारी मशीनरी प्रयोग की है और अपनी शक्ति का दुरुप्रयोग किया है। सरकारी कर्मचारियों को चुनाव में प्रयोग करना अवैध है। 12 जून, 1975 को इलाहबाद उच्चन्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने अपना निर्णय दिया। याचिका को स्वीकार करते हुए उन्होंने इंदिरा गाँधी के निर्वाचन को रद्द कर दिया। इसका अर्थ था की इंदिरा गाँधी लोकसभा का सदस्य नहीं रही थी। इससे सारे देश में एक सन्नाटा - सा छा गया। अपील पर सर्वोच्च न्यायालय ने २४ जून, 1975 को उच्च न्यायालय के फैसले पर आंशिक रूप से रोक लगाई और कहा की इंदिरा गाँधी अपील के फैसले तक संसद तो बनी रहेगीं परन्तु लोक सभा की कार्यवाही में भाग नहीं ले सकेंगी।
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आपातकाल के संदर्भ में विवाद
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 6: लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट - प्रश्नावली [पृष्ठ १२६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Political Science [Hindi] Class 12
पाठ 6 लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
प्रश्नावली | Q 6. | पृष्ठ १२६
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