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प्रश्न
आजादी के समय विकास के सवाल पर प्रमुख मतभेद क्या थे? मतभेदों को सुलझा लिया गया?
थोडक्यात उत्तर
उत्तर
आजादी के समय के प्रश्न पर प्रमुख मतभेद निम्नलिखित थे -
विकास के क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि हो और सामाजिक न्याय भी मिले - इसे सुनिश्चित करने के लिए सरकार कौन - सी भूमिका निभाए? इस सवाल पर मतभेद थे। क्या कोई ऐसा केंद्रीय संगठन जरूरी है जो पुरे देश के लिए योजना बनाए? क्या सरकार को कुछ महत्त्वपूर्ण उद्योग और व्यवसाय खुद चलाने चाहिए? अगर सामाजिक न्याय आर्थिक संवृद्धि की जरूरतों के आड़े आता हो तो ऐसी सूरत में सामाजिक न्याय पर कितना जोर देना उचित होगा?
इनमे से कुछ प्रश्नों को आंशिक तौर पर सुलझा लिया गया, परन्तु कुछ प्रश्न ऐसे हैं जिन्हे अभी भी सुलझाना बाकि है। कुछ सुलझे हुए मतभेद निम्न प्रकार से है।
- सभी विचार धारा के नेतागण और राजनैतिक दल आर्थिक समृद्धि और आर्थिक, सामाजिक दोनों तरह की बात करते है। कुछ सुलझे हुए मतभेद निम्न प्रकार से है।
- सभी इस बात पर सहमत हैं की देश के व्यापार, उद्योगों और कृषि को क्रमश: व्यावारियों, उद्योगपतियों और किसानो के भरोसे पूरी तरह नहीं छोड़ा जा सकता।
- सरकार ने सन 1947 से लेकर 1990 के दशक के शुरू होने से पहले आर्थिक विकास में प्रमुख भूमिका निभाई लेकिन 1990 के दशक से आज तक हम यह कह सकते है की मिश्रित निति छोड़ दी गई है और देश में नई आर्थिक निति अपनाई जा रही है लेकिन नियोजन की निति को छोड़ा नहीं गया। अब भी कई महत्त्वपूर्ण उद्योगों पर सरकार का एकाधि कार है। जैसे रेलवे उद्योग, लेकिन धीरे - धीरे अनेक उद्योगों में सहकारी हिस्सों को बेचा जा रहा है और उदारीकरण और वैश्वीकरण के अंतर्गत देशी और विदेशी पूँजीपतियाँ, कंपनियों के हिस्से और निवेश को निरंतर बढ़ाया जा रहा है।
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