मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (मराठी माध्यम) इयत्ता ९ वी

‘अगर न नभ में बादल होते’ इस विषय पर अपने विचार लिखिए। - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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प्रश्न

‘अगर नभ में बादल होते’ इस विषय पर अपने विचार लिखिए।

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

अगर नभ में बादल न होते विषय अकल्पनीय है। नभ में जब सफेद बादल छाते हैं, तो ऐसा लगता है कि उसने सफेद चादर ओढ़ ली हो और जब बादल काले होकर गरजने लगते हैं वायुमंडल में मौजूद वाष्प का संघनन ही बादल हैं। 'बादल सागरों, महासागरों की अथाह जलराशि को ग्रहण करते हैं, तब बारिश की शुरुआत होती है। यदि नभ में बादल न होते तो पूरा विश्व गर्मी की मार से झुलस जाता। फिर वर्षा की जीवनदायिनी बूँदों को पृथ्वी पर बरसाकर सृष्टि का पालन करते हैं। आकाश में बिजली नहीं चमकती और न ही बारिश होती। नदी, तालाब, पशु, मनुष्य पानी के अभाव में ज्राहि-त्राहि करने लगते।यदि बादल न होते तो एक ओर तो सागर अपनी मर्यादा तोड़ देते सदानीरा नदियाँ निरंतर अपना जल सागर को समर्पित करती रहती हैं।खेतों में फसलें न लहलहातीं और वनों में पेड़-पौधे नहीं बचते। पेड़-पौधे, नदी, झरने, तालाब, समुद्र आदि सूख जाते। हमें मोर का नृत्य कभी देखने को नहीं मिलता। सभी पक्षी प्यासे होकर शोर मचाते। भोर के समय गंगा स्नान करने का सुख नहीं मिलता। यदि इस जल का संघनन करने के लिए बादल न होते तो यह जलराशि इतना बढ़ जाती कि सागर तट व निकटवर्ती स्थान जल-समाधि ले लेते।वहाँ विनाश-लीला मच जाती।बारिंश के पानी में बच्चों की नाव नहीं दौड़ती। संक्षेप में कहें तो बादलों के अभाव में हमारा जीवन ही रुक जाता, इसलिए नभ में बादलों का होना बहुत जरूरी है।दूसरी ओर वर्षा के अभाव में पृथ्वी पर जीवसृष्टि समाप्त हो जाती। वर्षा नहीं तो किसी भी प्रकार की वनस्पति नहीं और अंतत: पृथ्वी पर जीवन न रहता।

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सागर और मेघ
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पाठ 2.6: सागर और मेघ - स्वाध्याय [पृष्ठ ४४]

APPEARS IN

बालभारती Hindi (Composite) - Lokvani Class 9 Maharashtra State Board
पाठ 2.6 सागर और मेघ
स्वाध्याय | Q ५ | पृष्ठ ४४

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  मेघ

संजाल पूर्ण कीजिए:


स्‍वमत लिखिए:

अगर सागर न होता तो ______


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