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प्रश्न
अलंकार के भेदों सहित अन्य एक-एक उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर
शब्दालंकार के भेद:
- अनुप्रास अलंकार: वर्णों की आवृत्ति बार-बार अर्थात जहाँ वर्णो की पुनरावृत्ति से चमत्कार उत्पन्न होता है तब वहाँ ‘अनुप्रास अलंकार’ होता है।
उदाहरण: ‘कालिंदी कूल कदंब की डारिन’ अनुप्रास अलंकार के उदाहरण में ‘क’ और ‘ल’ वर्ण की आवृति हुई है। - यमक अलंकार: जिस वाक्य में एक ही शब्द की बार-बार पुनरावृत्ति होती है, लेकिन हर बार उस शब्दा का अर्थ अलग-अलग होता है तो उसे वहाँ पर ‘यमक अलंकार’ होता है।
उदाहरण:
माला फेरत जग गया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डारि दे, मन का मनका फेर।
उदाहरण में ‘मनका’ शब्द का दो बार प्रयोग किया गया है। पहली बार ‘मनका’ का आशय माला के मोती से है और दूसरी बार ‘मनका’ का आशय मन की भावनाओ से है। - श्लेष अलंकार: जहाँ पर कोई एक शब्द एक ही बार आता है, लेकिन उस शब्द के अर्थ भिन्न-भिन्न निकलते है, तो वहाँ पर ‘श्लेष अलंकार’ होता है।
उदाहरण:
जो घनीभूत पीड़ा थी
मस्तक में स्मृति-सी छाई।
दुर्दिन में आँसू बनकर
वह आज बरसने आई।
उदाहरण में जैसा की आप देख सकते हैं, यहाँ ‘घनीभूत’ शब्द से दो अर्थ निकल रहे हैं। पहला अर्थ है मनुष्य के मन में कुछ समय से इकट्ठी पीड़ा जो अब आँसू के रूप में बह निकली है। दूसरा अर्थ है मेघ बनी हुई अर्थात बादल जो कुछ दिनों से पानी को इकठ्ठा कर रहे थे वे अब उसे बरसा रहे हैं।
अर्थालंकार के भेद:
- उपमा अलंकार: जब किन्ही दो वस्तुओं के गुण, आकृति, स्वभाव आदि में समानता दिखाई जाए या दो भिन्न वस्तुओं कि तुलना कि जाए, तब वहाँ ‘उपमा अलंकार’ होता है।
उदाहरण:
सागर-सा गंभीर हृदय हो,
गिरि-सा ऊँचा हो जिसका मन।
इस उदाहरण में सागर और गिरी उपमान, मन और हृदय उपमेय, सा वाचक शब्द, गंभीर और ऊँचा साधारण धर्म है। - रूपक अलंकार: जब गुण की अत्यंत समानता के कारण उपमेय को ही उपमान बता दिया जाए यानी उपमेय ओर उपमान में अभिन्नता दर्शायी जाए तब वह ‘रूपक अलंकार’ कहलाता है।
उदाहरण:
बीती विभावरी जागरी।
अम्बर पनघट में डुबो रहीतारा-घाट उषा नागरी।
उदाहरण में देख सकते हैं यहाँ उषा में नागरी का, अम्बर में पनघट का और तारा में घाट का निषेध रहित आरोप हुआ है। यहाँ आप देख सकते हैं की उपमान एवं उपमेय में अभिन्नता दर्शायी जा रही है। - उत्प्रेक्षा अलंकार: जब समानता होने के कारण उपमेय में उपमान के होने कि कल्पना की जाए या संभावना हो तब वहाँ ‘उत्प्रेक्षा अलंकार’ होता है। यदि पंक्ति में मनु, जनु, जनहु, जानो, मानहु मानो, निश्चय, आदि आता है वहाँ ‘उत्प्रेक्षा अलंकार’ होता है।
उदाहरण:
बहुत काली सिल जरा-से लाल केसर से
कि जैसे धुल गई हो।
उदाहरण में जैसा कि आप देख सकते हैं बहुत काले पत्थर की ज़रा से लाल केसर से धुलने कि कल्पना कि गयी है।
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