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प्रश्न
अलंकार पढ़िए और समझिए:
उत्तर
अलंकार और उसके भेद | |||||
शब्दालंकार: जहाँ काव्य में किसी विशेष शब्द के प्रयोग से चमत्कार या उसके सौंदर्य में वृद्धि होती है, वहाँ शब्दालंकार होता है। | अर्थालंकार: जब काव्य में शब्दों के अर्थ से काव्य सौंदर्य में वृद्धि होती है, तब वहाँ अर्थालंकार होता है। | ||||
अनुप्रास: उदाहरण में ‘च’ वर्ण की आवृत्ति बार-बार हुई है अतः यह अनुप्रास अलंकार है। | यमक: उदाहरण में एक कनक का अर्थ सोना और दूसरे कनक का अर्थ धतूरा है। एक शब्द के दो अर्थ हैं। अतः यह यमक अलंकार हैं। | श्लेष: इस उदाहरण में बारे का अर्थ जलाने पर और बचपन में तथा बढ़े का अर्थ बुझने पर और बड़े होने पर है यहाँ एक शब्द के अनेक अर्थ हैं। अतः यह श्लेष अलंकार है। | उपमा: उदाहरण में शब्द समानता प्रकट की गई है। यहाँ एक वस्तु को दूसरे के समान बताया गया है। अतः यह उपमा अलंकार है। | रूपक: उदाहरण में एक वस्तु पर अर्थात राम पर धन (रतन) का (राम रूपी धन) का आरोप किया गया है। अतः यह रूपक अलंकार है। | उत्प्रेक्षा: उदाहरण में एक वस्तु में दूसरी वस्तु का अर्थात श्याम के शरीर पर पीत वस्त्र और नील पर्वत पर हुए प्रभात की संभावना की गई है। अतः यह उत्प्रेक्षा अलंकार है। |
उदाहरण: चारु चंद्र की चंचल किरणें खेल रहीं हैं जल-थल में। |
उदाहरण: कनक-कनक ते सौगुनी, मादकता अधिकाय। वा खाए बौराय नर, वा पाए बौराय। |
उदाहरण: जो रहीम गति दीप की कुल कपूत गति सोई। बारे उजियारो करे बढ़े अँधेरों होई। |
उदाहरण: उषा सुनहले तीर बरसती जय लक्ष्मी- सी उदित हुई। |
उदाहरण: पायोजी मैंने राम-रतन धन पायो। |
उदाहरण: साेहत ओढ़े पीत पट श्याम सलोने गात। मनहुँ नीलमणि शैल पर आतप पर्यो परभात।। |
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